भारतकोश
बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)

बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)

Bisaldev Raso of Narapati Nalha on Ajmer Chauhans

नरपति नाल्ह द्वारा

DevanagariHindipublished315 पृष्ठ

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पृष्ठ 158
  • ५२ - ऐस वचन¹ किम बोलिजइ² । मरस्या³ जे अकुलीणी नारि⁴ ॥ तुं राव कुलवंती किम मरइ । एतउ झोर मिसि छोडा दे नारि ॥ ७१ ॥ दूज तीजह⁵ राता गमण न होइ । चउथि⁶ गयपति पूजइ⁷ सबु कोइ ॥ पांचमि छठि सुन्द⁸ दिन नहीं । सातिमि सुहुद्दिसि⁹ कपइ काल¹⁰ ॥ तिखि दिन गाम न चालिजइ । आठमि कहइ दिन बड़इ दिसासूल ॥ तिथ दिन उछव गम नहीं ।

१. आ० ६ इसावचन । २. आ० १२ बोलिजै । ३. आ० ६ मरस्यइ, आ० १२ मरिस्थे । ४ आ० १२ जिका अकुलीणीय नारि । यह छंद आ० ६ में ७५ है और आ० १२ में ६८ है । यह छंद की ५ वीं पंक्ति आ० १२ में है— तू कुलवतीण ।।। इस छंद की ६ ठी पंक्ति आ० १२ में है— एने तू क्रूर मिसि छोडी दे नारि ॥ ५. आ० १२ बीज तीजा । ६. आ० १२ चोथि । ७. आ० १२ पूजै । ८. आ० १२ राजा । ९. आ० १२ चिहुँ दिसि । १०. आ० १२ टपइ धा ।