भारतकोश
बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)

बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)

Bisaldev Raso of Narapati Nalha on Ajmer Chauhans

नरपति नाल्ह द्वारा

DevanagariHindipublished315 पृष्ठ

पृष्ठ 191, कुल 315 में से

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पृष्ठ 191
  • ८५ - हुआ^१ उतारद्द^२ राइ पहुचाण । पडंछ पश्चित सखी^३ दीयउ मेशदाण ॥ साधि पहरागर मंत्रि दइँ^४ । थंभण भाट करइ वयाण ॥ घडराण्या रूढि दरपीया । मन^५ हरप्यउ^६ वीसल चहुवाण^७ ॥ जे तण्ड^८ परच राजा सखइ^९ होइ । भानमती राणी पूरवइ सोइ ॥ ल्हण कपूर सवे सहू । नवकर^१० कापड़ा साम्हू घोर ॥ घडराण्या नइ जू जू था । वदियो मनि बधावर वीर ॥ काणेम करिययो परघ की । तउ तत संभारि घणो छइ म्हारउ बीर ॥ १. आ० १२ हउ । २ आ० १२ उतारउ । ३. आ० १२ पश्चिम पौलिखी । ४ आ० १२ छै । ५. आ० १२ मनि । ६. आ० १२ हरष्या । ७. आ० १२ चौहाण । यह छंद आ० ६ में नहीं है । आ० १२ में १०६ है । ८. आ० १२ जेवला । ९. आ० १२ तणै । १०. आ० ६ नवरंग । यह छंद आ० ६ में १२१ है । आ० १२ में इस छंद की प्रथम पंक्ति नहीं है जो इस प्रति की छंद संख्या ११० के साथ संलग्न है ।
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