भारतकोश
बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)

बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)

Bisaldev Raso of Narapati Nalha on Ajmer Chauhans

नरपति नाल्ह द्वारा

DevanagariHindipublished315 पृष्ठ

पृष्ठ 205, कुल 315 में से

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पृष्ठ 205

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  • ६६ - किम दिन काढ़इ भाणिमी। राति दिवस मोनहूँ¹ धारीय चींत॥ जेतइ थाउइ सीमर घणो²। तेतइ चंचल पडव करड थे मीत॥१३७॥ पात न मागीय³ चालीयइ⁴ उठि। पाटलस हे⁵ मथकाइयइ⁶ पूठि॥ दांत⁷ पांहूँ⁸ दाही कुटियी। हड तड फोकड¹⁰ देवर अरु¹¹ घडउ¹² जेठ॥ गाल फाड़ानउ थारा गछसमी। काढे¹³ नाक¹⁴ सरीसा¹⁵ होउ॥१३८॥ १. आ० २ मो, आ० ६ मेरे । २. अ० जइ फाउ, यह छंद अ० २ खड ३ में २१, आ० ६ खड ३ मे २६, आ० ६ में नहीं है। आ० १२ म नहीं है। लेकिन अ० और आ० ६ में ५वीं, ७वीं तथा ८वीं पंक्तियाँ इस प्रकार हैं— ५. किम भव नीगमसि कामिणी (आ० ६ लोशेदकी)। ६. कहाउ इमारउ जे करइ (आ० ६ मुझइ)। ७ तोहि नह कह (आ० ६ तोहिनोको) सो पटवो (आ० ६ सोपा- डीयो)। करि देउ (आ० ६ करिदीयउ) मीत। ३. आ० ६ एतो कही नै, अ० २ इतोकहे जन। ४. आ० १२ चालीय। ५. अ० २ ले पाटो अरि, आ० ६ दोय पाटा सुं, आ० १२ लेपाटो। ६ अ० २ पटकी छइ, आ० ६ माहरी, आ० १२ मथफाइय। ७+८. अ० २ नाक पाट फटाउ। ९. अ० २ हूँ, आ० ६ (में नहीं है)। १०. अ० २ तेतू, आ० ६ तेणे, आ० १० कोकुं। ११+१२. अ० २ आरी, बडो, आ० १२ अरु घडी। १३ अ० २ उपलो, आ० ६ उपलै, अ ० १२ फाडु। १४+१५. आ० ६ ताक सरीसा।
बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य) · पृष्ठ 205, कुल 315 में से · BharatKosha