बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)
Bisaldev Raso of Narapati Nalha on Ajmer Chauhans
नरपति नाल्ह द्वारा
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अजमेर
अजमेर मेवाड का प्रान्त राजपूताने के मध्य भाग में बसा हुआ है। इसके पश्चिम में मारवाड़ के राज्य, उत्तर में किशनगढ और मारवाड़, पूर्व में जयपुर और किशनगढ़ तथा दक्षिण मे मेवाड प्रान्त है। इसका पूरा क्षेत्रफल २१६७.६ मील है और इसकी आबादी ५०६६६४ की है । यह अक्षांश २५ २४ उत्तर तथा देशान्तर ७३°४५ पूर्व के बीच बसा हुआ है। इसके अजमेर और मेवाड दो भाग हैं। अजमेर की लम्बाई उत्तर तथा दक्षिण मे ८० मील और चौड़ाई ५० मील है। मेवाड ४८ मील लम्बा और १५ मील चौड़ा है। (Ajmer Mewara Gazetter 1904) पुराकाल में अजमेर को 'अजयमेरु' कहते थे । आजकल अजमेर का किला 'तारागढ़' के नाम से प्रसिद्ध है। छठी शताब्दी में महाराज अजयपाल चौहान ने इस किले को बनवाया था। ये "सपाद लक्ष" के राजा थे और इसकी राज- धानी सांभर थी। इन्होंने ही अजमेर शहर को भी बसाया था। 'फयसागर' के दक्षिण स्थित 'अजयसर' आज भी इनके नाम को चिरस्थायी बनाये हुए है। 'पृथ्वीराज विजय' के अनुसार अजयदेव द्वितीय ने एक नगर बसाया था और उसी नगर का नाम राजा अजयदेव के नाम के ऊपर 'अजमेर' रखा गया। डा० बुहलर (Buhler) ने भी इसी मत का समर्थन करते हुए कहा है कि अजमेर नगर अजयदेव द्वितीय द्वारा ही बसाया गया था। 'पृथ्वीराज विजय' सर्ग ३ में यह भी कहा गया है कि अरणोराज या अनाजी के तीसरे पुत्र सोमेश्वर ने अपने बड़े भाई और पूर्वज विग्रहराज के राजमहलों के समीप एक नगर बसाया था और उसका नाम अपने नाम के ऊपर रखा था। श्रीहरि बिलास जी शारदा का कहना है कि 'As these palaces stood in Ajmer, the town founded by Someswar and named after Arnoraj, must has existed in or near Ajmer. No one howerer has heard of such a town and there is no men- tion of it in any book. The fact evedently is that several chanhan Kings repaired renovated or improued the existing town and the court poets, given to exaggeration have stated that each of the kings founded this town. Ajiyadev II made improvements & additions to the town of Ajmer & probably transferred his capital from Sakambhara (Sambher) to Ajmer the poet gives him credit for forming it