बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)
Bisaldev Raso of Narapati Nalha on Ajmer Chauhans
नरपति नाल्ह द्वारा
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साम्भर सम्भैर नगर जोधपुर और जयपुर राज्यों की सीमा के अन्दर राजपूताने में २६°५५ उत्तर तथा ७५°११ पूर्व साभर झील के किनारे बसा हुआ है। आधु- निक नगर की प्रायः सभी उपयोगी वस्तुयों, जैसे तार घर, विद्यालय, अस्पताल आदि से यह नगर सुसज्ज है। यह नगर चौहान राजपूतों की ८ वीं शताब्दी से ही प्रधान राजधानी माना जाता है। अन्तिम हिन्दू राजा पृथ्वीराज चौहान साभर राय अर्थात् साभर के महाप्रभु कहलाते थे। इतिहास से ज्ञात होता है कि यह नगर मुसलमान बादशाहों के अधिकार में १३ वीं शताब्दी से सन् १७०८ ई० तक रहा, जब कि यह जोधपुर और जयपुर के शासन-कर्त्ताओं द्वारा पुनः उनसे ले लिया गया। साभर झील यहाँ की प्रमुख झील है। यह झील जयपुर और जोधपुर राज्यों के छोर पर २६°५३ तथा २७°२ उत्तर एव ७४°५४ और ७५°१४ पूर्व अजमेर से ५१ मील उत्तर पूर्व तथा दिल्ली से २३० मील दक्षिण पश्चिम बना हुआ है। यह झील समुद्र की सतह से करीब १२०० फुट की ऊँचाई पर है। जब यह भरी रहती है तो इसका क्षेत्रफल करीब ६० वर्गमील हो जाता है। गर्मी के दिनों में यदि कोई इसके एक छोर पर खड़ा होकर दूसरे छोर पर दृष्टि डाले तो यह उसे एक अति विशाल हिम का टुकड़ा नज़र आयगा। लेकिन सचमुच में यह हिम का टुकड़ा नहीं वरन् नमक का शान्त और स्थिर समुद्र है, जो देखने में हिम के टुकड़े के समान दिखाई पड़ता है। किंवदंती प्रसिद्ध है कि शाकभरी देवी ने अपनी पूजा से प्रसन्न होकर एक घने जंगल को विशाल चाँदी के टुकड़े में परिवर्तित कर दिया था और बाद में वहाँ के निवा सियों द्वारा प्रार्थना करने पर उसी स्थान को नमक की झील के रूप में बदल दिया। इसलिए इस झील का नाम 'साम्बर', साकभर का परिवर्तित रूप, पड़ा। यह कथा ६ ठी शताब्दी की है। इतिहास बताता है कि अकबर के राज्य काल से लेकर अहमदशाह के समय तक मुसलमान बादशाहों के हाथ में रहा। अब यह जयपुर और जोधपुर के महाराजाओं के हाथ में है। इसका पश्चिमी हिस्सा पूरा महाराज जोधपुर तथा पूर्वी हिस्सा साभर नगर के साथ जोधपुर और जयपुर दोनों महाराजाओं के हाथ में है। कुछ समय के लिए यह झील मराठों और अमीर खाँ के हाथ में चली गयी थी, जब कि १८३५ से १८४३ तक अगरेजों ने इसे शेखावटी में शान्ति स्थापनार्थ खर्चे के निमित्त अपने अधिकार में रखा था। अन्त में १८७० से यह झील पूर्ण रूप से अगरेजों को लीज पर दे दी गई। और जयपुर तथा