भारतकोश
बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)

बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)

Bisaldev Raso of Narapati Nalha on Ajmer Chauhans

नरपति नाल्ह द्वारा

DevanagariHindipublished315 पृष्ठ

पृष्ठ 296, कुल 315 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 296

१३ - १६३ - परिचय दे रहे हैं। यह एक पुराना शहर है, जो गंगा और महानन्दा के संगम पर बसा हुआ है। पद्मपुराण में गौड़ देश का उल्लेख मिलता है और इस देश के राजा का नाम "नरसिंह" था, ऐसा पाया जाता है। पाल वंश के राजाओं ने गौड़ प्रदेश की राजधानी कालिन्दी नदी के किनारे "रामावती" नगरी को बनायी थी। लेकिन इस राजधानी का अब कुछ भी पता नहीं चलता। गौड के राजा लक्ष्मण सेन द्वारा बनायी गयी लक्ष्मणावती बहुत काल तक सेन वंश, और मुसलमान राजाओं की राजधानी रही। सेन वंश के राजा वल्लालसेन के द्वारा गौड में "वल्लालवाडी" नामक एक दुर्ग बनवाया गया था, जिसका भग्नावशेष अब शाहदुल्लापुर के समीप प्राप्त है। आज भी गौड के समीप श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा पवित्र किए हुए स्थान 'रामकेलि' तथा 'रूप' और 'सनातन' के रहने के स्थान रूप सागर, तालाब, कदम्ब का वृक्ष, कुछ कूप एवं मदनमोहन जी का पुरातन मन्दिर पाये जाते हैं। मुसलमान काल के कुछ उल्लेख योग्य स्थान जैसे जामज नमियों की मस्जिद, हवेली खास का भग्ना- वशेष, सोना मसजिद, फीरोज मीनार आदि यहाँ वर्तमान हैं। इनके अतिरिक्त गौडेश्वरी देवी, जहरवासिनी देवी तथा शिव के पुराने मन्दिर भी अभी यहाँ वर्तमान हैं। हर्ष के काल से लेकर लक्ष्मणसेन के काल तक एक नहीं अनेक ऐसे शिलालेख तथा ताम्रपत्र प्राप्त हो चुके हैं, जो गौड देश के प्राचीन इतिहास पर पूर्ण रूप से प्रकाश डालते हैं। इन शिलालेखों और ताम्रपत्रों में से मालवा के राजाओं के नागपुर के शिलालेख 'ई० सन् ११०४-११०५' का उल्लेख इसलिए आवश्यक है कि बीसलदेव रासो में गौड देश के उल्लेख का सूत्र इसके द्वारा स्थापित हो जाता है। इस शिला लेख के द्वारा पता चलता है कि परमार राजा लक्ष्मदेव ने गौड के राजा को हराया था। 'उडीसा' उड़ीसा प्रदेश गंगा नदी के मुहाने से लेकर कृष्णा नदी के मुहाने तक फैला हुआ है। कलिंग के नाम से इस प्रदेश का उल्लेख संस्कृत ग्रन्थों में अनेक स्थलों पर किया गया है। यह भारत के पाँच प्राचीन राज्यों में से एक है। इसकी पुरानी राजधानी अभी भी नगर से आध मील की दूरी पर कलिंगपट्टनम् में वर्तमान है। राज्य दो भागों विभाजित है। गोदावरी के मुहाने (Delta) तक के स्थानो को कलिंग कहा जाता है तथा उत्तर की ओर महानदी के मुहाने तक के स्थान एक अलग प्रदेश बनाते हैं, जिन्हें ओड्र या उत्कल कहा जाता

बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य) · पृष्ठ 296, कुल 315 में से · BharatKosha