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बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)

बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)

Bisaldev Raso of Narapati Nalha on Ajmer Chauhans

नरपति नाल्ह द्वारा

DevanagariHindipublished315 पृष्ठ

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सम्बलपुर राज्य को जीता और सम्बलपुर राज्य के जीतने के साथ उनका अधिकार पटना राज्य पर भी हो गया । मयूरभज का १३०० वर्षों का पुराना इतिहास बताता है कि यहाँ जयसिंह नामक एक राजा हुए थे । उनके बाद उनका ज्येष्ठ पुत्र यहाँ का राजा हुआ था, उनका मझला पुत्र क्यौन्झार का राजा हुआ । बौड और दसपल्ला राज्य के प्रमुख भी इसी राजा जयसिंह के वंशज अपने को बताते हैं । अथ मल्लिक, नरसिंगपुर,पाललहरा, तालचर और टिगिरिया राज्य के राजा गण भी अपने को राजपूत कुल का मानते हैं । नयागढ को बसाने वाले रीवा के राजपूत थे और उन्हीं के कुल के पूर्वज खण्डपरा राज्य के अधिष्ठाता थे । उडीसा का रनपुर राज्य सबसे प्राचीन माना जाता है और यहाँ के राजाओं का इतिहास प्रायः ३६०० वर्ष पुराना माना गया है । इस राज परिवार का ही एक ऐसा इतिहास है जिसमें यहाँ के आदि आगन्तुकों का चिन्ह वर्तमान है । यहाँ के राजाओं की सार्वभौमता सर्वदा अक्षुण्ण रही । मुगल और मराठा काल में भी यहाँ के आन्तरिक मामलों में उनके द्वारा कभी हस्त- क्षेप नहीं किया गया । सन् १८०३ में मराठों से ही अंगरेजो ने उडीसा को अपने अधिकार में लिया था ।