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बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)

बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)

Bisaldev Raso of Narapati Nalha on Ajmer Chauhans

नरपति नाल्ह द्वारा

DevanagariHindipublished315 पृष्ठ

पृष्ठ 81, कुल 315 में से

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पृष्ठ 81
  • ७४ - है अपने ढंग का आकर्षक, मुख्य कथा से जुड़ा हुआ स्वाभाविक और प्रासंगिक, तथा हृदय पर गहरा प्रभाव डालने वाला । यहाँ इस कथन में भी अतिशयोक्ति न होगी कि षड्ऋतु-वर्णन की परम्परा का प्रारम्भ करने का श्रेय हिन्दी साहित्य में सर्वप्रथम कवि नरह को ही है; यदि हम बीसलदेव रासो को हिन्दी साहित्य का प्राचीनतम ग्रंथ मानते हैं, जिसे ऐसा मानने में हमें तब तक कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए जब तक इसे खण्डित करने के लिए कोई पुष्ट प्रमाण न मिल जाय । चरित्र-चित्रण दृश्य काव्यों में महाकाव्य के अतिरिक्त अन्य काव्यों में समग्र रूप से किसी चरित्र का चित्रण सम्भव नहीं होता । चरित्र-चित्रण के दो प्रकार होते हैं एक 'आदर्श' और दूसरा 'यथार्थ' । 'आदर्श' चरित्र-चित्रण में कवि अपनी भावना के अनुसार अपने काव्य के नायक अथवा नायिका के चरित्र में किसी प्रकार का दोष अथवा कोई त्रुटि नहीं आने देता । लेकिन 'यथार्थ' चरित्र के चित्रण के लिये कवि को अपने काव्य के लिये ऐसे नायक या ऐसी नायिका को चुनना पड़ता है जिसका सम्बन्ध संसार में नित्य प्रति देखे जाने वाले चरित्र के यथातथ्य रूप से होता है । 'आदर्श' चरित्र के भी दो प्रकार हैं-एक तो जातीय, राष्ट्रीय, सामाजिक और धार्मिक विचारों का अधिक से अधिक पूर्ण रूप से समन्वय करने वाला 'लोकादर्श चरित्र' जैसे रामचरित मानस के राम का और दूसरा उस ढंग के समन्वय या लौकिक औचित्य की भावना को गौण करके कोई एक भाव पराकाष्ठा तक पहुँचाने वाला 'ऐकान्तिक आदर्श चरित्र' ।¹ ऐसे ऐकान्तिक चरित्र धर्म और अधर्म दोनों के आदर्श हो सकते हैं जैसे धर्म के आदर्श सीता, भरत, हनुमान आदि एवं अधर्म का आदर्श रावण । बीसलदेव रासो के नायक और उसकी नायिका का चरित्र-चित्रण 'यथार्थ' की कोटि में आता है । इस रासो के नायक राजा बीसलदेव एक ऐतिहासिक पुरुष हैं । ग्रंथ की रचना-तिथि पर विचार करते हुए विशद रूप से इस बात पर भी विचार किया गया है कि ग्रन्थ के नायक कौन से बीसलदेव हो सकते हैं, तथा इस निष्कर्ष पर भी पहुँचना पड़ा है कि इस रासो के नायक बीसलदेव तृतीय हैं । यहाँ १. रेवातट — पृथ्वीराजरासो—सं० डा० विपिनबिहारी त्रिवेदी—भूमिका पृ० ४२ ।
बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य) · पृष्ठ 81, कुल 315 में से · BharatKosha