भारतकोश
संक्षिप्त ब्रह्मपुराण

संक्षिप्त ब्रह्मपुराण

Brahma Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished434 पृष्ठ

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* वैवस्वत मनुके वंशजोंका वर्णन * १९

पुत्री संज्ञा विवस्वान्‌की पत्नी हुई। उसके गर्भसे सूर्यने तीन संतानें उत्पन्न कीं, जिनमें एक कन्या और दो पुत्र थे। सबसे पहले प्रजापति श्राद्धदेव, जिन्हें वैवस्वत मनु कहते हैं, उत्पन्न हुए। तत्पश्चात् यम और यमुना—ये जुड़वीं संतानें हुईं। भगवान् सूर्यके तेजस्वी स्वरूपको देखकर संज्ञा उसे सह न सकी। उसने अपने ही समान वर्णवाली अपनी छाया प्रकट की। वह छाया संज्ञा अथवा सवर्णा नामसे विख्यात हुई। उसको भी संज्ञा ही समझकर सूर्यने उसके गर्भसे अपने ही समान तेजस्वी पुत्र उत्पन्न किया। वह अपने बड़े भाई मनुके ही समान था, इसलिये सावर्ण मनुके नामसे प्रसिद्ध हुआ। छाया-संज्ञासे जो दूसरा पुत्र हुआ, उसकी शनैश्चरके नामसे प्रसिद्धि हुई। यम धर्मराजके पदपर प्रतिष्ठित हुए और उन्होंने समस्त प्रजाको धर्मसे संतुष्ट किया। इस शुभकर्मके कारण उन्हें पितरोंका आधिपत्य और लोकपालका पद प्राप्त हुआ। सावर्ण मनु प्रजापति हुए। आनेवाले सावर्णिक मन्वन्तरके वे ही स्वामी होंगे। वे आज भी मेरुगिरिके शिखरपर नित्य तपस्या करते हैं। उनके भाई शनैश्चरने ग्रहकी पदवी पायी।


वैवस्वत मनुके वंशजोंका वर्णन

**लोमहर्षणजी कहते हैं—**वैवस्वत मनुके नौ पुत्र उन्हींके समान हुए; उनके नाम इस प्रकार हैं—इक्ष्वाकु, नाभाग, धृष्ट, शर्याति, नरिष्यन्त, प्रांशु, अरिष्ट, करूष तथा पृषध्र। एक समयकी बात है, प्रजापति मनु पुत्रकी इच्छासे मैत्रावरुण-याग कर रहे थे। उस समयतक उन्हें कोई पुत्र नहीं हुआ था। उस यज्ञमें मनुने मित्रावरुणके अंशकी आहुति डाली। उसमेंसे दिव्य वस्त्र एवं दिव्य आभूषणोंसे विभूषित दिव्य रूपवाली इला नामकी कन्या उत्पन्न हुई। महाराज मनुने उसे ‘इला’ कहकर सम्बोधित किया और कहा—‘कल्याणी! तुम मेरे पास आओ।’ तब इलाने पुत्रकी इच्छा रखनेवाले प्रजापति मनुसे यह धर्मयुक्त वचन कहा—‘महाराज! मैं मित्रावरुणके अंशसे उत्पन्न हुई हूँ, अतः पहले उन्हींके पास जाऊँगी। आप मेरे धर्ममें बाधा न डालिये।’ यों कहकर वह सुन्दरी कन्या मित्रावरुणके समीप गयी और हाथ जोड़कर बोली—‘भगवन्! मैं आप दोनोंके अंशसे उत्पन्न हुई हूँ। आपलोगोंकी किस आज्ञाका पालन करूँ? मनुने मुझे अपने पास बुलाया है।’

**मित्रावरुण बोले—**सुन्दरी! तुम्हारे इस धर्म, विनय, इन्द्रियसंयम और सत्यसे हमलोग प्रसन्न हैं। महाभागे! तुम हम दोनोंकी कन्याके रूपमें प्रसिद्ध होगी तथा तुम्हीं मनुके वंशका विस्तार करनेवाला पुत्र हो जाओगी। उस समय तीनों