भारतकोश
संक्षिप्त ब्रह्मपुराण

संक्षिप्त ब्रह्मपुराण

Brahma Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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५२ * संक्षिप्त ब्रह्मपुराण *


अम्भस् तथा मही। ये सब पापोंका अपहरण करनेवाली नदियाँ हैं। इनके अतिरिक्त भी वहाँ बहुत-सी छोटी-छोटी नदियाँ और पर्वत हैं। कुशद्वीपमें कुशोंका बहुत बड़ा वन है, अतः उसीके नामपर उस द्वीपकी प्रसिद्धि हुई है। वह द्वीप अपने ही बराबर विस्तारवाले घीके समुद्रसे घिरा हुआ है।

मुनिवरो! उपर्युक्त घीका समुद्र क्रौञ्चद्वीपसे घिरा हुआ है। उसका विस्तार कुशद्वीपसे दुगुना है। क्रौञ्चद्वीपके राजा द्युतिमान् हैं। महात्मा द्युतिमान्‌के सात पुत्र हैं। महामना द्युतिमान्‌ने अपने पुत्रोंके ही नामसे क्रौञ्चद्वीपके सात विभाग किये, जिनके नाम ये हैं—कुशग, मन्दग, उष्ण, पीवर, अन्धकारक, मुनि और दुन्दुभि। क्रौञ्चद्वीपमें भी बड़े ही मनोरम सात वर्षपर्वत हैं, जिनपर देवता और गन्धर्व निवास करते हैं। उनके नाम ये हैं—क्रौञ्च, वामन, अन्धकारक, देवव्रत, धर्म, पुण्डरीकवान् तथा दुन्दुभि। ये एक-दूसरेसे दुगुने बड़े हैं। जितने द्वीप हैं, द्वीपोंमें जितने पर्वत हैं तथा पर्वतोंद्वारा सीमित जितने वर्ष हैं, उन सभी रमणीय प्रदेशोंमें देवताओंसहित समस्त प्रजा बेखटके निवास करती है। क्रौञ्चद्वीपमें पुष्कल, पुष्कर, धन्य तथा ख्यात—ये चार वर्ण हैं, जो क्रमशः ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य एवं शूद्रकी कोटिके माने गये हैं। वहाँ छोटी-बड़ी सैकड़ों नदियाँ हैं, जिनमें सात प्रधान हैं—गौरी, कुमुद्वती, संध्या, रात्रि, मनोजवा, ख्याति तथा पुण्डरीका। क्रौञ्चद्वीपके निवासी इन्हीं नदियोंका जल पीते हैं। वहाँ पुष्कर आदि वर्णोंके लोग यज्ञके समीप ध्यानयोगके द्वारा रुद्रस्वरूप भगवान् जनार्दनका यजन करते हैं। क्रौञ्चद्वीप अपने समान परिमाणवाले दधिमण्डोद नामक समुद्रसे घिरा हुआ है तथा वह समुद्र भी शाकद्वीपसे आवृत्त है। शाकद्वीपका विस्तार क्रौञ्चद्वीपसे दूना है। उसके स्वामी महात्मा भव्य हैं। उनके सात पुत्र हैं, जिन्हें राजाने उस द्वीपके सात विभाग करके वहाँका राज्य दिया है। राजपुत्रोंके नाम ये हैं—जलद, कुमार, सुकुमार, मनीरुक, कुसुमोद, मोदाकि तथा महाद्रुम। इन्हींके नामोंपर वहाँके सात वर्ष प्रसिद्ध हुए हैं। वहाँ भी सात पर्वत हैं, जो जलद आदि वर्षोंकी सीमा निर्धारित करते हैं। उनके नाम इस प्रकार हैं—उदयगिरि, जलधार, रैवतक, श्याम, अम्भोगिरि, आस्तिकेय तथा केसरी। वहाँ शाक (सागवान) का बहुत बड़ा वृक्ष है, जहाँ सिद्ध और गन्धर्व निवास करते हैं। उसके पत्तोंको छूकर बहनेवाली वायुका स्पर्श होनेसे बड़ा आनन्द मिलता है। वहाँके पवित्र जनपद चार वर्णोंके लोगोंसे सुशोभित हैं। शाकद्वीपमें महात्मा पुरुष निर्भय एवं नीरोग होकर निवास करते हैं। वहाँकी नदियाँ भी परम पवित्र तथा सब पापोंका नाश करनेवाली हैं। उनके नाम ये हैं—सुकुमारी, कुमारी, नलिनी, रेणुका, इक्षु, धेनुका तथा गभस्ति। इनके अतिरिक्त वहाँ छोटी-छोटी हजारों नदियाँ हैं। पर्वत भी सहस्रोंकी संख्यामें हैं, जलदादि वर्षोंके निवासी बड़ी प्रसन्नताके साथ पूर्वोक्त नदियोंका जल पीते हैं। मग, मागध, मानस तथा मन्दग—ये ही वहाँके चार वर्ण हैं—मग ब्राह्मण, मागध क्षत्रिय, मानस वैश्य तथा मन्दग शूद्र जानने चाहिये। शाकद्वीपमें रहनेवाले लोग अपने मन और इन्द्रियोंको संयममें रखकर शास्त्रोक्त सत्कर्मोंके द्वारा सूर्यरूपधारी भगवान् विष्णुका पूजन करते हैं। शाकद्वीप अपने ही बराबर विस्तारवाले क्षीरसागरद्वारा सब ओरसे घिरा हुआ है।

क्षीरसागरको पुष्करद्वीपने चारों ओरसे घेर रखा है। उसका विस्तार शाकद्वीपसे दुगुना है। पुष्करके महाराज सवनको दो पुत्र हुए—महावीत और धातकि। उन्हीं दोनोंके नामपर उस द्वीपके दो विभाग हुए हैं एकका नाम महावीतवर्ष और

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