भारतकोश
संक्षिप्त ब्रह्मपुराण

संक्षिप्त ब्रह्मपुराण

Brahma Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished434 पृष्ठ

पृष्ठ 57, कुल 434 में से

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पृष्ठ 57

* पाताल और नरकोंका वर्णन तथा हरिनाम-कीर्तनकी महिमा * ५५

बारंबार श्वास-वायुके लगनेसे सम्पूर्ण दिशाओंको सुवासित करता रहता है, प्राचीन ऋषि गर्गने जिनकी आराधना करके सम्पूर्ण ज्योतिष-शास्त्रका यथार्थ ज्ञान प्राप्त किया था, उन्हीं नागश्रेष्ठ भगवान् शेषने इस पृथ्वीको धारण कर रखा है और वे ही देवता, असुर तथा मनुष्योंके सहित समस्त लोकोंका भरण-पोषण करते हैं।'

ब्राह्मणो! पातालके अनन्तर रौरव आदि नरक हैं, जिनमें पापियोंको गिराया जाता है। उन नरकोंके नाम बतलाता हूँ, सुनो। रौरव, शौकर, रोध, तान, विशसन, महाज्वाल, तप्तकुम्भ, महालोभ, विमोहन, रुधिरान्ध, वसातप्त, कृमीश, कृमिभोजन, असिपत्रवन, लालाभक्ष्य, पूयवह, वह्निज्वाल, अधःशिरा, संदंश, कृष्णसूत्र, तम, अवीचि, श्वभोजन, तथा अप्रतिष्ठ इत्यादि बहुत-से नरक हैं, जो अत्यन्त भयंकर हैं। ये सब यमके राज्यमें हैं। शस्त्र, अग्नि और विषके द्वारा यातना देनेके कारण वे सभी नरक अत्यन्त भयंकर हैं। जो मनुष्य पापकर्मोंमें लगे रहते हैं, वे ही उन नरकोंमें गिरते हैं। जो झूठी गवाही देता, पक्षपातपूर्वक बोलता तथा असत्य भाषण करता है, वह मनुष्य रौरव-नरकमें पड़ता है। जो गर्भके बच्चेकी हत्या कराता, गुरुके प्राण लेता, गायको मारता तथा दूसरोंके श्वास रोककर मार डालता है, वे सभी घोर रौरव नरकमें गिरते हैं। शराबी, ब्रह्महत्यारा, सुवर्णकी चोरी करनेवाला तथा इन पापियोंसे संसर्ग रखनेवाला मानव शौकर नरकमें जाता है। जो क्षत्रिय और वैश्यकी हत्या करता, गुरुपत्नीसे संसर्ग रखता, बहनके साथ व्यभिचार करता तथा राजदूतके प्राण लेता है, वह तप्तकुम्भ नामक नरकमें पड़ता है। जो शराब तथा सिंहको बेचता और अपने भक्तका त्याग करता है, वह तप्तलोह नामक नरकमें गिरता है। पुत्री और पुत्र-वधूके साथ समागम करनेवाला पापी महाज्वाल नामक नरकमें गिराया जाता है। जो नीच अपने गुरुजनोंका अपमान करता, उन्हें गालियाँ देता, वेदोंको दूषित करता, उन्हें बेचता तथा अगम्या स्त्रियोंके साथ समागम करता है, वे सभी शबल नामक नरकमें जाते हैं। चोर तथा मर्यादामें कलङ्क लगानेवाला मनुष्य विमोह नामक नरकमें गिरता है। देवताओं, द्विजों तथा पितरोंसे द्वेष रखनेवाला एवं रत्नको दूषित करनेवाला मनुष्य कृमिभक्ष्य नामक नरकमें पड़ता है। जो दूषित यज्ञ करता और देवताओं, पितरों एवं अतिथियोंको दिये बिना ही स्वयं खा लेता है, वह लालाभक्ष्य नामक भयंकर नरकमें जाता है। बाण बनानेवाला बेधक नामके नरकमें गिरता है। जो कर्णी नामक बाण तथा खड्ग आदि आयुधोंका निर्माण करता है। वह अत्यन्त भयंकर विशसन नामक नरकमें गिराया जाता है। जो द्विज नीच प्रतिग्रह स्वीकार करता है। यज्ञके अनधिकारियोंसे यज्ञ करवाता है तथा केवल नक्षत्र बताकर जीविका चलाता है, वह अधोमुख नामक नरकमें जाता है। जो अकेला ही मिठाई खाता है, वह मनुष्य कृमिपूय नामक नरकमें जाता है। लाख, मांस, रस, तिल और नमक बेचनेवाला ब्राह्मण भी उसी नरकमें पड़ता है। बिल्ली, मुर्गी, बकरा, कुत्ता, सूअर तथा चिड़िया पालनेवाला भी कृमिपूयमें ही गिरता है। जो ब्राह्मण रङ्गमञ्चपर नाचकर जीविका चलाता, नाव चलाता, जारज मनुष्यका अन्न खाता, दूसरोंको जहर देता, चुगली खाता, भैंससे जीविका चलाता, पर्वके दिन स्त्रीसम्भोग करता, दूसरोंके घरमें आग लगाता, मित्रोंकी हत्या करता, शकुन बताकर पैसे लेता, गाँवभरकी पुरोहिती करता

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