संक्षिप्त ब्रह्मपुराण
Brahma Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें* दक्षद्वारा भगवान् शिवकी स्तुति * ९१
ही अनम्य और आप ही नमन करनेके योग्य हैं। आप हर्षमग्न होकर किलकारियाँ भरनेवाले हैं। आपको नमस्कार है। सोते हुए, सोये हुए, सोकर उठे हुए, खड़े हुए और दौड़ते हुए आपको नमस्कार है। कुबड़े और कुटिलरूपमें आपको नमस्कार है। आप सदा ताण्डव नृत्य करनेवाले और मुखसे बाजा बजानेवाले हैं। आपको नमस्कार है। आप बाधा निवारण करनेवाले, लुब्ध एवं गाना-बजाना करनेवाले हैं। आपको नमस्कार है। ज्येष्ठ और श्रेष्ठरूपमें आपको नमस्कार है। बलका मन्थन करनेवाले आपको नमस्कार है। उग्र रूपवाले आपको सदा नमस्कार है। दस भुजाओंवाले आपको नित्य प्रणाम है। हाथमें कपाल धारण करनेवाले आपको नमस्कार है। श्वेत भस्म आपको अधिक प्रिय है। आप भयभीत करनेवाले, भयंकर एवं कठोर व्रत धारण करनेवाले हैं। आपको नमस्कार है।
आपका मुख नाना प्रकारसे विकृत है, जिह्वा तलवारके समान है और दाँत बड़े भयंकर हैं। पक्ष, मास और लवार्ध आदि कालके भेद आपके ही स्वरूप हैं। आपको तूँबी और वीणा बहुत ही प्रिय है। आपको नमस्कार है। आपका रूप घोर और अघोर दोनों ही है। आप घोर और अघोरतर हैं; ऐसे होते हुए भी आप शिव, शान्त तथा अत्यन्त शान्त हैं। आपको नमस्कार है। शुद्ध बुद्धिरूप आपको नमस्कार है। सबको बाँटना आप अधिक पसन्द करते हैं। आप पवन, सूर्य एवं सांख्यपरायण हैं। आप एक प्रचण्ड घण्टा धारण करनेवाले और घण्टा-ध्वनिके समान बोलनेवाले हैं। आपके पास बराबर घण्टा रहा करता है। आप लाखों घण्टेवाले हैं। घण्टोंकी माला आपको अधिक प्रिय है। मैं आपको प्रणाम करता हूँ। आप प्राणोंको दण्ड देनेवाले, नित्य एवं लोहितरूप हैं। आपको नमस्कार है। आप हूं-हूं करनेवाले, रुद्र एवं भगाकारप्रिय हैं। आपको नमस्कार है। आपका कहीं पार नहीं है। आप सदा पर्वतीय वृक्षोंको अधिक पसन्द करते हैं। आपको नमस्कार है। यज्ञोंके अधिपतिरूपमें आपको नमस्कार है। आप भूत एवं प्रस्तुत (वर्तमान)-रूप हैं। आपको नमस्कार है। आप यज्ञवाहक, जितेन्द्रिय, सत्यस्वरूप, भग, तट, तटपर होने योग्य तथा तटिनीपति (समुद्र) हैं। आपको नमस्कार है। आप अन्नदाता, अन्नपति और अन्नके भोगी हैं। आपको नमस्कार है। आपके सहस्रों मस्तक और सहस्रों चरण हैं। आप सहस्रों शूल उठाये रहनेवाले और सहस्रों नेत्रोंवाले हैं। आपको नमस्कार है। आपका वर्ण उदयकालीन सूर्यके समान लाल है। आप बालकरूप धारण करनेवाले हैं। आपको नमस्कार है। आप बालसूर्यस्वरूप हैं और काल आपका खिलौना है। आपको नमस्कार है। आप शुद्ध, बुद्ध, क्षोभण तथा क्षयरूप हैं। आपको नमस्कार है।*
* नमो होमाय मन्त्राय शुक्लध्वजपताकिने। नमोऽनम्याय नम्याय नमः किलकिलाय च॥
नमस्त्वां शयमानाय शयितायोत्थिताय च। स्थिताय धावमानाय कुब्जाय कुटिलाय च॥
नमो नर्तनशीलाय मुखवादित्रकारिणे। बाधापहाय लुब्धाय गीतवादित्रकारिणे॥
नमो ज्येष्ठाय श्रेष्ठाय बलप्रमथनाय च। उग्राय च नमो नित्यं नमश्च दशबाहवे॥
नमः कपालहस्ताय सितभस्मप्रियाय च। विभीषणाय भीमाय भीष्मव्रतधराय च॥
नानाविकृतवक्त्राय खड्गजिह्वोग्रदंष्ट्रिणे। पक्षमासलवार्धाय तुम्बीवीणाप्रियाय च॥
अघोरघोररूपाय घोराघोरतराय च। नमः शिवाय शान्ताय नमः शान्ततमाय च॥
नमो बुद्धाय शुद्धाय संविभागप्रियाय च। पवनाय पतङ्गाय नमः सांख्यपराय च॥
नमश्चण्डैकघण्टाय घण्टाजल्पाय घण्टिने। सहस्रशतघण्टाय घण्टामालाप्रियाय च॥