भारतकोश
वेदान्त दर्शन: ब्रह्मसूत्र (शाङ्करभाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)

वेदान्त दर्शन: ब्रह्मसूत्र (शाङ्करभाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)

Vedanta Darshana: Brahma Sutra with Shankara Bhashya

भगवान् बादरायण व्यास व आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished486 पृष्ठ

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( १४ ) सूत्र विषय पृष्ठ १०—१३ वायुसे तेजकी, तेजसे जलकी और जलसे पृथिवीकी उत्पत्तिमें भी ब्रह्म ही कारण हैं, इसका प्रतिपादन .............. २११—२१३ १४-१५ सृष्टिक्रमके विपरीत प्रलयक्रमका कथन तथा इन्द्रियोंकी उत्पत्तिमें क्रमविशेषका अभाव .................................... २१३-२१५ १६–२० जीवके जन्म-मृत्यु-वर्णनकी औपचारिकता तथा जीवात्माकी नित्यता .................................................... २१६–२२० २१-२९ जीवात्माके अणुत्वका खण्डन और विभुत्वकी स्थापना ... २२०-२२६ ३०-३२ जीव शरीरके सम्बन्धसे एकदेशी है, सत् जीवात्माका ही सृष्टिकालमें प्राकट्य होता है और वह अन्तःकरणके सम्बन्धसे विषयोंका अनुभव करता है, इसका प्रतिपादन... २२६-२३० ३३–४२ जीवात्माका कर्तापन शरीर और इन्द्रियोंके सम्बन्धसे औपचारिक है तथा उसमें परमात्मा ही कारण हैं; क्योंकि वह उन्हींके अधीन है, इसका निरूपण ....................... २३०–२३८ ४३-४७ जीवात्मा ईश्वरका अंश है, किंतु ईश्वर उसके दोषोंसे लिप्त नहीं होता; इसका प्रतिपादन ............................ २३८-२४३ ४८-५० नित्य एवं विभु जीवोंके लिये देहसम्बन्धसे विधि-निषेधकी सार्थकता और उनके कर्मोंका विभाग ........................ २४३-२४५ ५१-५३ जीव और ब्रह्मके अंशांशिभावको औपाधिक माननेमें सम्भावित-दोषोंका उल्लेख .................................... २४५-२४७ चौथा पाद १-४ इन्द्रियोंकी उत्पत्ति भूतोंसे नहीं परमात्मासे ही होती है, इसका प्रतिपादन और श्रुतियोंके विरोधका परिहार ....... २४८-२५० ५-७ इन्द्रियोंकी संख्या सात ही है, इस मान्यताके खण्डनपूर्वक मनसहित ग्यारह इन्द्रियोंकी सिद्धि तथा सूक्ष्मभूतोंकी भी ब्रह्मसे उत्पत्तिका कथन ............................................. २५१-२५२ ८-१३ मुख्य प्राणकी ब्रह्मसे ही उत्पत्ति बताकर उसके स्वरूपका निरूपण ................................................................. २५३-२५६