भारतकोश
वेदान्त दर्शन: ब्रह्मसूत्र (शाङ्करभाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)

वेदान्त दर्शन: ब्रह्मसूत्र (शाङ्करभाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)

Vedanta Darshana: Brahma Sutra with Shankara Bhashya

भगवान् बादरायण व्यास व आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished486 पृष्ठ

पृष्ठ 442, कुल 486 में से

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सूत्र २१ ] अध्याय ४ ४३९ श्रुतिवर्णित मार्गसे भिन्न हैं। इसके सिवा वे योगीके लिये कहे गये हैं। इस प्रकार विषयका भेद होनेके कारण वहाँ आवृत्ति और अनावृत्तिके लिये नियत किये हुए कालविशेषसे इस श्रुतिनिरूपित गतिमें कोई विरोध नहीं आता। जो लोग गीताके श्लोकोंमें काल शब्दके प्रयोगसे दिन, रात, शुक्लपक्ष, कृष्णपक्ष, उत्तरायण, दक्षिणायन— इन शब्दोंको कालवाचक मानकर उनसे कालविशेषको ही ग्रहण करते हैं, उन्हींके लिये यह समाधान किया गया है; किंतु यदि उन शब्दोंका अर्थ लोकान्तरमें पहुँचानेवाले उन-उन कालोंके अभिमानी देवता मान लिया जाय तो श्रुतिके वर्णनसे कोई विरोध नहीं है। दूसरा पाद सम्पूर्ण