ब्रह्मवैवर्त पुराण

ब्रह्मवैवर्त पुराण
Brahma Vaivarta Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
DevanagariHindipublished810 पृष्ठ
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( १४ )
| विषय | पृष्ठ-संख्या | विषय | पृष्ठ-संख्या |
|---|---|---|---|
| वृन्दावनका दर्शन करते हुए नन्दभवनमें जाना, नन्दद्वारा उनका स्वागत-सत्कार, उन्हें श्रीकृष्णके विविध रूपोंमें दर्शन, उनके द्वारा श्रीकृष्णकी स्तुति तथा श्रीकृष्णको मथुरा चलनेकी सलाह देना, गोपियोंद्वारा अक्रूरका विरोध और उनके रथका भञ्जन, श्रीकृष्णका उन्हें समझाना और आकाशसे दिव्य रथका आगमन | ६५९ | वर्णन | ६८७ |
| ५३- शुभ लग्नमें यात्रासम्बन्धी मङ्गलकृत्य करके श्रीकृष्णका मथुरापुरीको प्रस्थान, पुरीकी शोभाका वर्णन, कुब्जापर कृपा, मालीको वरदान, धोबीका उद्धार, कुब्जाका गोलोकगमन, कंसका दुःस्वप्न, रङ्गभूमिमें कंसका पधारना, धनुर्भङ्ग, हाथीका वध, कंसका उद्धार, उग्रसेनको राज्यदान, माता-पिताके बन्धन काटना, वसुदेवजीद्वारा नन्द आदिका सत्कार और ब्राह्मणोंको दान | ६६३ | ६१- गृहस्थ, गृहस्थ-पत्नी, पुत्र और शिष्यके धर्मका वर्णन, नारियों और भक्तोंके त्रिविध भेद, ब्रह्माण्ड-रचनाके वर्णन-प्रसङ्गमें राधाकी उत्पत्तिका कथन | ६९२ |
| ५४- श्रीकृष्णका नन्दको अपना स्वरूप और प्रभाव बताना; गोलोक, रासमण्डल और राधा-सदनका वर्णन; श्रीराधाके महत्त्वका प्रतिपादन तथा उनके साथ अपने नित्य सम्बन्धका कथन और दिव्य विभूतियोंका वर्णन | ६६९ | ६२- चारों वर्णोंके भक्ष्याभक्ष्यका निरूपण तथा कर्मविपाकका वर्णन | ६९७ |
| ५५- श्रीकृष्णद्वारा नन्दजीको ज्ञानोपदेश, लोकनीति, लोकमर्यादा तथा लौकिक सदाचारसे सम्बन्ध रखनेवाले विविध विधि-निषेधोंका वर्णन, कुसङ्ग और कुलटाकी निन्दा, सती और भक्तकी प्रशंसा, शिवलिङ्ग-पूजन एवं शिवकी महत्ता | ६७३ | ६३- केदार-कन्याके वृत्तान्तका वर्णन | ७०३ |
| ५६- जिनके दर्शनसे पुण्यलाभ और जिनके अनुष्ठानसे पुनर्जन्मका निवारण होता है, उन वस्तुओं और सत्कर्मोंका वर्णन तथा विविध दानोंके पुण्यफलका कथन | ६७६ | ६४- सनत्कुमार आदिके साथ श्रीकृष्णका समागम, सनत्कुमारके द्वारा श्रीकृष्णके रहस्योद्घाटन करनेपर नन्दजीका पश्चात्तापपूर्ण कथन तथा मूर्च्छित होना | ७०८ |
| ५७- सुस्वप्न-दर्शनके फलका विचार | ६७९ | ६५- श्रीकृष्णका नन्दको दुर्गा-स्तोत्र सुनाना तथा ब्रज लौट जानेका आदेश देना, नन्दका श्रीकृष्णसे चारों युगोंके धर्मका वर्णन करनेके लिये प्रार्थना करना | ७१० |
| ५८- श्रीकृष्णके द्वारा नन्दको आध्यात्मिक ज्ञानका उपदेश, बाईस प्रकारकी सिद्धि, सिद्धमन्त्र तथा अदर्शनीय वस्तुओंका वर्णन | ६८१ | ६६- श्रीकृष्णद्वारा चारों युगोंके धर्मादिका कथन, श्रीकृष्णको गोकुल चलनेके लिये नन्दका आग्रह | ७१३ |
| ५९- दुःस्वप्न, उनके फल तथा उनकी शान्तिके उपायका वर्णन | ६८४ | ६७- श्रीकृष्णका उद्धवको गोकुल भेजना, उद्धवका गोकुलमें सत्कार तथा उनका वृन्दावन आदि सभी वनोंकी शोभा देखते हुए राधिकाके पास पहुँचना और राधास्तोत्रद्वारा उनका स्तवन करना | ७१७ |
| ६०- ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र, संन्यासी तथा विधवा और पतिव्रता नारियोंके धर्मका | ६८- राधा-उद्धव-संवाद | ७२१ | |
| ६९- सखियोंद्वारा श्रीकृष्णकी निन्दा एवं प्रशंसा और उद्धवका मूर्च्छित हुई राधाको सान्त्वना प्रदान करना | ७२४ | ||
| ७०- उद्धवका कथन सुनकर राधाका चैतन्य होना और अपना दुःख सुनाते हुए उद्धवको उपदेश देकर मथुरा जानेकी आज्ञा देना | ७२६ | ||
| ७१- राधाका उद्धवको बिदा करना, बिदा होते समय उद्धवद्वारा राधा-महत्त्व-वर्णन तथा उद्धवके यशोदाके पास चले जानेपर राधाका मूर्च्छित होना | ७२९ | ||
| ७२- श्रीकृष्णद्वारा गोकुलका वृत्तान्त पूछे जानेपर उद्धवका उसे कहते हुए राधाकी दशाका विशेषरूपसे वर्णन करना | ७३१ | ||
| ७३- गर्गजीका आगमन और वसुदेवजीसे पुत्रोंके उपनयनके लिये कहना, उसी प्रसङ्गमें मुनियों और देवताओंका आना, वसुदेवजीद्वारा |