ब्रह्मचर्य साधना
Brahmacharya Sadhana
स्वामी शिवानन्द सरस्वती द्वारा
स्रोत: 1980 Hindi 2nd Edition (Yoga-Vedanta Forest Academy) · Yoga-Vedanta Forest Academy / The Divine Life Trust Society, Rishikesh · 1980 (उद्गम)
पृष्ठ 109, कुल 237 में से
संदर्भ में पढ़ें६४
ब्रह्मचर्य साधना
जप कीजिये। व्रत अधिकतर धार्मिक किया है। न कि स्वास्थ्य के दृष्टि कोण से केवल शारीरिक स्थूल किया। आप को चाहिये कि आप व्रत के दिनों को उच्चतर आध्यात्मिक साधनों तथा भगवत् चिंतन के काम में लावें। नित्य ईश्वर संबंधी विचारों को ही ग्रहण करें। इस विश्व की उत्पत्ति क्यों और किसलिये हुई इत्यादि जीवन के गंभीर प्रश्नों पर पूर्ण विचार कीजिये। अन्वेषण कीजिये “मैं कौन हूँ ?” “यह आत्मा या ब्रह्म क्या है ?” “ब्रह्म ज्ञान प्राप्त करने की विधि और साधन क्या हैं ?” “भगवान् के समीप किस प्रकार पहुँचाजाय ?” पुनः अपनी नित्यानन्द अवस्था का अनुभव कीजिये और सदा पवित्रता की स्थिति में स्थित रहिये।
ऐ मेरे प्रिय बन्धुओं ! क्या आप इन पक्तियों को पढ़ते ही तत्क्षण व्रत रूपी तपश्चर्या का श्री गणेश करेंगे तथा अपने अनुभव का सही सही वृत्तान्त मुझे लिख भेजने का प्रयत्न करेंगे ? ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः
— : • : —