भारतकोश
ब्रह्मचर्य साधना

ब्रह्मचर्य साधना

Brahmacharya Sadhana

स्वामी शिवानन्द सरस्वती द्वारा

स्रोत: 1980 Hindi 2nd Edition (Yoga-Vedanta Forest Academy) · Yoga-Vedanta Forest Academy / The Divine Life Trust Society, Rishikesh · 1980 (उद्गम)

DevanagariHindipublished237 पृष्ठ

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ब्रह्मचर्य साधना

की आवश्यकता तथा उसके महत्व को समझ गया। ठीक उसी समय से उसने सौत्ताह आध्यात्मिक साधना प्रारंभ कर दी। उसने जीवन पर्यन्त अखंडित ब्रह्मचर्य व्रत पालन करने की दृढ़ प्रतिज्ञा कर ली। उसने उर्ध्वरेता योगी बन कर आत्मसाक्षात्कार प्राप्त कर लिया। वह तब से सुकरात के प्रिय शिष्यों में एक गिना जाने लगा।

(५) एक पिशाच (भूत) की कहानी

मन ही पिशाच है, जो नित्य अशांत रहता है। एक बार एक ब्राह्मण पंडित ने मंत्र-सिद्धि के द्वारा किसी पिशाच को बस में कर डाला। पिशाच ने पंडित से कहा “मैं प्रत्येक कार्य एक ही मिनट में कर सकता हूँ। मेरे पास अलौकिक शक्तियाँ हैं। आप मुझे नित्य विविध प्रकार के कार्य करने के लिये देते रहिये। यदि बिना काम के एक मिनट भी मुझे छोड़ा, तो याद रखिये मैं आप ही को तत्काल भस्म कर जाऊँगा।” ब्राह्मण ने इस बात को स्वीकर कर लिया। उस पिशाच ने ब्राह्मण के लिये एक तालाब खोदा, हल चलाया और थोड़े ही समय में विविध प्रकार के अनेक कार्य कर डाले। अब उस के पास कुछ भी कार्य शेष नहीं रहा जिसमें वह उस देव को लगा सके। देव ने ब्राह्मण को डाट कर कहा “अब मेरे लिये कुछ भी नहीं है; मैं आप ही को भस्म करूँगा।” ब्राह्मण व्याकुल होकर असमंजस में पड़ गया। वह कुछ भी नहीं जान सका कि अब उसे क्या करना चाहिये। वह अपने गुरुजी के पास गया और सब हाल कह सुनाया। गुरुजी ने कहा “अपनी साधारण बुद्धि से काम लो। अपने घर के सामने एक लूँवा, मजबूत लकड़ी का स्थंभ खड़ा कर दो