संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)
Brahmanda Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 806, कुल 893 में से
संदर्भ में पढ़ें३६६ ] [ ब्रह्माण्ड पुराण
इस तरह से दिखाई गयीं उन शक्तियों को देखकर जो मैरेय सीधु से आनन्दित हो रही थीं दण्डिनी अत्यन्त प्रसन्न हुई थी और उससे कहा था ।८५। हे मद्याब्धे ! मैं बहुत ही यदि तुष्ट हुई हूँ। आपने हमारी सहायता की है। यह देव कार्य है इसको आपने विघ्न रहित कर दिया है ।८६। अब इससे आगे द्वापर युग में मेरे प्रसाद से मख में याज्ञिकों के द्वारा सोम के पान के ही समान आप अत्यन्त उपयोग के योग्य होंगे ।८७। समस्त देवगण याग में मन्त्र से पूत करके इसका पान किया करेंगे। यागों में मन्त्र से पवित्र का पान भक्तजन करेंगे ।८८। इसके प्रभाव से सिद्धि-ऋद्धि-स्वर्ग-अपवर्ग को प्राप्त करेंगे। महेश्वरो-महादेव-बलदेव-भार्गव-दत्तात्रेय-विधि-विष्णु-ऐसे महान सिद्धि जन भी तुम्हारा पान करेंगे ।८६। याग में समन्वित तू सब प्रकार की प्रदान करोगी ।६०। इस प्रकार से वरदान के द्वारा सुराम्बुधि को तुष्ट किया था ।६१।
मन्त्रिणी त्वरयामास पुनर्युद्धाय दण्डिनी ।
पुनः प्रवृत्ते युद्धं शक्तीनां दानवैः सह ॥६२मुदाट्टहासनिर्भिन्नदिगष्टकधरा धरम् ।
प्रत्यग्रमदिरामत्ताः पाटलीकृतलोचनाः ।
शक्तयो दैत्यचक्रेषु न्यपतन्नेकहेलया ॥६३द्वयेन द्वयमारेजे शक्तीनां समदर्शियाम् ।
मदरागेण चक्षूंषि दैत्यरक्तेन शस्त्रिका ॥६४तथा बभूव तुमुलं युद्धं शक्तिसुरद्विषाम् ।
यथा मृत्युरवित्रस्तः प्रजाः संहरते स्वयम् ॥६५संस्खलत्पदविन्यासामदेनारक्तदृष्टयः ।
स्खलदक्षरसंदर्भवीरभाषा रणोद्धताः ॥६६कदम्बगोलकाकारा हृष्टसर्वांगदृष्टयः ।
युवराजस्य सैन्यानि शक्तयः समनाशयन् ॥६७अक्षौहिणीशतं तत्र दण्डिनी सा व्यदारयत् ।
अक्षौहिणीसार्द्धशतं नाशयामास मन्त्रिणी ॥६८