ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)
Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary
आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा
DevanagariHindipublished737 पृष्ठ
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( २७ ) लिप्तास्तत्त्वयम॑हता २२५ लब्धं द्योष्राष्टुचांतरादृता छेषात् । तिथिकृति २२५ हृत्फल्युता लब्धषष्ट्या द्वा ग्रहणमेवम् ॥ १० ॥ ज्यां प्रोह्य शेषगुणितास्तत्त्वयमा ज्यांतरा धृतालब्धम् । क्षेप्यं विशुद्धजीवासंख्यातिथि कृतिवधे चापम् ॥ ११ ॥
१०. (घ) १. ज्याष्टचांतरा (ग) ज्याज्यांतरा (क) ज्याज्यांतरा (च) for (द्याष्टचांतरा)
२. हृतात् (क) for (हृत्)
३. ष्ट्या (ग) ज्या (क) (ख) षष्ट for (षष्ट्या)
४. ज्या (ग) ज्या (क) (ख) ज्या for (द्वा)
(ग) ५. मलहता (ख) यमाहृता for (यमहृता)
६. २२५ हृतातफल for (हृत्फल)
७. लब्धं for (लब्ध)
(क) २. हृतातफलयुतात् for (हृत्फलयुता)
(ख) १. लब्धद्याष्टचां for (लब्धद्याषष्टचां)
८. ग्रहणमेव for (ग्रहणमेवम्)
(च) ६. २., २२५ हृतातफलयुता for (२२५ हृत्फलयुता)
३. ष्ट्या for (षष्ट्या)
४. द्वा for (द्वा)
११. (घ) १. ज्यांतरो (क) ज्यांतरोद्धृता (च) ज्यांतरोधृता for (ज्यांतराधृता)
२. संख्या for (संख्या)
(ग) ३. गुणितातत्त्वयमा २२५ for (गुणितास्तत्त्वयमा)
४. ++न++
५. ++२२५++
(क) ६. सेष (ख) सेष for (शेष)
(ख) ७. प्रयोज्यय for (प्रोह्य)
८. क्षेपं for (क्षेप्यं)
(च) ७. प्रोज्य for (प्रोह्य) ८. क्षेप्यं for (क्षेप्यं)