ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)
Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary
आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा
DevanagariHindipublished737 पृष्ठ
पृष्ठ 416, कुल 737 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 416
( ३० ) १ सूर्यस्य मनुद्वितयं त्रिंशोनं⁴ दिनदलेन तस्य प्राक् ।₅ १/४ ३/३० तिथि²घटिकाभिस्त्र्यं³शाधिकोनमूनाधिकं पश्चात् । ६ २ं०¹ ।। २० ।। द्युदले जिनलिप्तोनं दशनद्वितयं (३/३ ६)⁵ द्विशर¹ ५२ कलोनु प्राक्² । पश्चाद्युतोर्नमिदोः³ सूर्यवहण धन परिध्यंशाः⁴ ।। २१ ।।
२०. (घ) १. १/४ ३/३० | १/४ ३/३ (ग) for (१/४ ३/३०)
२. तिथि + १५ + (ग) for (तिथि)
३. त्र्यंशा (ग) स्त्रियंशाधिकोन १४।०।। १३।२०।। for (स्त्र्यंशाधिकोन)
(ग) ४. त्र्यंशोनं (क) for (त्रिंशोनं)
५. पश्चात् व for (पश्चात्)
(च) २. + १५ + १ संख्या लुप्त
३. त्र्यं ३/४ ३/३ | ३/४ ३/३ शाधिको for (त्र्यंशाधिको)
२१. (घ) १. कलोनं (ग) (क) (ख) कालोनं for (कलोनु)
२. यहां ‘५२’ संख्या जो ‘द्विशर’ के बाद अंकित है, लिखी है ।
३. मंदोः for (मिदोः)
(ग) ५. संख्या अंकित नहीं है ।
६. संख्यां अंकित नहीं है ।
(क) ७. सूर्याहरण for (सूर्यवहण)
(ख) ८. द्युदलेतिन for (द्युदलेजिन)
(च) ६. संख्यालुप्त १ कलोनं for (कलोनु)
२. + ५२ + ७ सूर्यवहण for (सूर्यवहण)