ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)
Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary
आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा
DevanagariHindipublished737 पृष्ठ
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? Let's check the meter: Line 2-3: फलविकला वा सूर्ये प्रागृणमसकृन्नते धनं पश्चात् । (Arya: 12 + 18) फ ल वि क ला (5) वा (2) सूर् ये (3) प्रा गृ ण म स कृ न्न ते (9) = 19? Wait: फलविकला वा सूर्ये (12 morae: फ(1) ल(1) वि(1) क(1) ला(2) वा(2) सूर्(2) ये(2) = 12) प्रागृणमसकृन्नते धनं पश्चात् (18 morae: प्रा(2) गृ(1) ण(1) म(1) स(1) कृन्(2) न(1) ते(2) ध(1) नं(2) पश्(2) चात्(2) = 18). Line 3: केन्द्रफलमृणं चन्द्रेऽन्यथा धनं चेदृणं स्पष्टौ ॥ २८ ॥ (12 + 15) केन्(2) द्र(1) फ(1) ल(1) मृ(1) णं(2) चन्(2) द्रेऽ(2) = 12. न्य(1) था(2) ध(1) नं(2) चे(2) दृ(1) णं(2) स्पष्(2) टौ