भारतकोश
ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary

आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा

DevanagariHindipublished737 पृष्ठ

पृष्ठ 423, कुल 737 में से

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पृष्ठ 423

( ३७ ) मन्दफलं मध्येऽङ्कौ तच्छीघ्रफलं च मध्यमे सकले । मध्ये सकृत् क्षितिसुतः स्पष्टो भुक्ति स्फुटाग्रहवत् ॥ ४० ॥ ग्रहकेन्द्रभुक्तिज्याकरगुणिताद्यजीवया भक्ता २१४। लब्धं स्फुट परिधिगुणं भगणांशहृतं कलाभिस्तु ॥ ४१ ॥

४०. (घ) १. फलं (ग) (क) (ख) फलस्य for (फल)
२. सकलो (ख) (च) for (सकले)
३. मध्येऽसकृत् (क) मध्यशकृत for (मध्येसकृत्)
४. भुक्तिः (ग) (च) for (भुक्ति)
६. क्षितिसुते (ख) for (क्षितिसुतः)
७ स्फुटौ for (स्फुटा)
(ख) ८. र्द्धा (च) र्द्ध for (ऽङ्कौ)
(च) ६. तत्शीघ्र for (तच्छीघ्र)
४१. (घ) १. ग्रहमंदकेन्द्र (ग) (क) ग्रहमंद्रकेंद्रा (ख) ग्रहमंदकेन्द्र for (ग्रहकेन्द्र)
२. ज्यतिर (ग) ज्यांतर (क) ज्यतिर (ख) ज्याँतर for (ज्याकर)
३. फलकबाभिः । (ग) (क) फलकलाभिः for (कलाभिस्तु)
(ग) ४. द्युजीवया (क) (ख) गुणिताद्या for (द्यजीवया)
(ख) ५. भक्ताः for (भक्ता )
६. स्फुटि for (स्फुट)
३. फलकलाभि for (कलाभिस्तु)
(च) १. ग्रहमंदकेंद्र for (ग्रहकेन्द्र )
२. ज्याँतर for (ज्याकर)
३. फलकबभिः for (कलाभिस्तु)
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