ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)
Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary
आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा
DevanagariHindipublished737 पृष्ठ
पृष्ठ 426, कुल 737 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 426
( ४० ) १अग्न्यष्टिभिरि२षुमनुभिः शरसूर्यैरिषु रसेंदु४भिस्त्रिभवैः । शीघ्रान्त्यकेन्द्रभागैर्भौमादीनां भवति ५वक्रम् ॥ ४८ ॥ १वक्रांशकैस्तदूनैः ३६० २रनुवक्रं तदधिकोन भागकलाः । मंदफलस्फुट ३भुत्तचून शीघ्रवृत्तचाहता दिवसाः ।। ४६ ।। ३शीघ्र१स्फुटा४ग्रहोना ५च्छेषे मध्यस्फुटांतराद्धं६ वा । अधिकेधन२मृणमूने स्फुटग्रहा मध्यमे कृत्वा ।। ८५० ।।
४८. (ग) १. अग्निष्टिभि (क) अग्न्यष्टिभि (च) for (अग्न्यष्टिभि)
२. रिषुमुनिभिः for (रिषुमनुभिः)
३. +भौ० व० कें० ।। ५ । १३ । ० ।। बु० व० कें० ।। ४ । २५ । ० । ० ।।
बृ० व० कें० ।। ४ । ५ । ० । ० ।। शु० व० कें० ।। ५ । १५ । ० । ० ।।
श० व० कें० ।। ३ । २३ । ० । ० ।।+
(ख) १. अग्न्याष्टिभि for (अग्न्यष्टभि)
४. रसेदुभि for (रसेंदुभि)
५. कर्म for (वक्रम्)
(च) २. रिषमनुभि for (रिषुमनुभिः)
४६. (क) १. चक्रांशकै for (वक्रांशकै)
(ख) २. वक्तं for (वक्रम्)
३. भुक्त्यान for (भुत्तचून)
५०. (घ) १. स्फुट (ग) (क) for (स्फुटा)
२. ग्रहान् (ग) (क) ग्रहान् for (ग्रहा)
(क) ३. शीघ्रात् (ख) for (शीघ्र)
४. ग्रहोनात् for (ग्रहोना)
(ख) ५. च्छेपे for (च्छेषे)
६. स्फुटार्धं वा for (स्फुटांतराद्धं वा)
७. नष्टणामूने for (नमृणामूने)
(च) २. स्फुटग्रहान् for (स्फुटग्रहा)
८. यहां क्रम संख्या भूल से “१५०” अंकित है ।
वि० यहां पर जो सारणी दी गई है। वह मूल पाठ में ५२ वें श्लोक में दी
गई है ।