ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)
Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary
आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा
DevanagariHindipublished737 पृष्ठ
पृष्ठ 437, कुल 737 में से
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( ५१ ) शंकुलंबश्छायाक्षज्या तद्वर्गसंयुते मूलम् । विषुवत्कर्णच्छाया कर्णोत्त्यदा शंकुः ॥ ७ ॥ उन्नतजीवाकोटिः छाया हग्ज्या भुजो नतज्या वा । कर्णच्छायावृत्तं व्यासार्द्धं द्वयमतोन्यत्र ॥ ८ ॥
७. (घ) १. क्षय्या (ग) क्षज्य (ख) वज्या for (क्षज्या)
२. मूलंम् (च) for (मूलम्)
३. विषुव तिथिषुव (ग) विषुवति विषुवति for (विषुवत्)
४. कर्णोन्यदा (ग) (क) कर्णोऽन्यदा for (कर्णोत्त्यदा)
(ग) ५. शंकुलम्बः (क) शंकुलंबश (ख) शंकुलंब for (शंकुलंब)
६. कर्णाः छाया (क) कर्णाश्छाया for (कर्णच्छाया)
(क) ७. +विषुवति+(च)
(ख) ७. +विषुवति+
४. कर्णोन्यदा for (कर्णोत्त्यदा)
(च) १. क्षय्या for (क्षज्या) ४. कर्णोन्यदा for (कर्णोत्त्यदा)
८. (घ) १. कोटिच्छाया for (कोटिः छाया) (ख) उत्ततजोवकोटि for (उन्नतजीवा-
कोटिः)
२. यत्रः for (यत्र)
(ग) ३. दृक्ज्या (क) शध्या for (हग्ज्या)
४. भुजानतज्यावा for (भुजोनतज्यावा) (ख) भुज्या for (भुजो)
५. कर्णाः for (कर्ण)
(क) ६. वा (छ) यः for (छाया)
७. तस्या (ज्या) द्या for (तज्या वा)
८. वृत्तव्यसार्द्धं for (वृत्तं व्यासार्द्धं)
९. द्वयासन्नोऽस्यत्रम् for (द्वयमतोन्यत्र)
इसकी श्लोक संख्या ६ है, संभवतः यह मूल है ।
(ख) १०. सार्द्धं for (सार्धं)
(च) १. कोटि for (कोटिः) ३. हग्द्या for (हग्ज्या)