भारतकोश
ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary

आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा

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पृष्ठ 473

( ८७ ) द्वादशभिः शितांगुसितजीवज्ञ⁶शनिभूमिजा नवभिः । द्यु³₂त्तर वृद्धैरंतरघटिका षड्⁷गुणिता कलां⁴शैः ॥ ६ ॥ १२₂।६।११।१३।१५।१७ ह³श्याहश्यायुतिवद्ग्रहार्कं⁴ भुक्त्यंतरैर्व्य⁵च⁶ललब्धदिनैः । ऊनाधिकलिप्ताभ्यः प्राग्वत् तात्कालिकैर¹सकृत् ॥ ७ ॥ प्रतिदिनमुदयास्तमयाव⁴सकृत् तात्कालिक गृहं⁵ विलग्रैः⁶ । सूर्यास्तमयोदयि⁵कैः शीतांशौ² पौर्णिमास्यन्ते³ ॥ ८ ॥

६. (घ) १. शीतांशुः (क) (ग) शीतांशुः for (शितांशु)
४. भूमिजातवभिः for (भूमिजानवभिः)
३. द्युत्तरदृद्धे (ग) द्युत्तरवृद्धि (क) द्युत्तरवृद्धै for (द्युत्तरवृद्ध्यै)
४. कालांशैः (ग) (क) for (कलांश