ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)
Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary
आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा
DevanagariHindipublished737 पृष्ठ
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( १८८ ) तज्ये³ परमफलज्या संगुणितात्¹ फ फले विनाद्याभिः²। इष्टोच्चनीचवृत्तव्यासार्द्धं परमफलजीवा ।। २३⁴ ।।
२३. (घ) वि० अतिरिक्त श्लोक -
तज्ये परमफलज्या संगुणितातफले विभुजकोट्यंशो न गुणा भार्द्धाशास्तच्चतुर्थे
भागो नेः। पंचद्रींदुखचंद्रै विभाजिता व्यासदलगुणिताः ।। २३ ।।
(वि० यह श्लोक यहाँ २३ संख्याक्रम पर पाया गया)
२३. (घ) (वि० इसकी क्रम संख्या २४ है ।)
१. तत्पले (ग) संगुणितास्तत्फले for (संगुणितातफले)
२. ज्याभिः (ग) (ङ) for (द्याभिः)
(ग) वि० अतिरिक्त श्लोक -
तव्ज्ये परमफलज्या संगुणितास्तत्फले विना ज्याभिः ।
इष्टोच्चनीचवृत्तः व्यासार्द्धं परमफलजीवा ।। २३ ।।
३. तत् ज्ये for (तज्ये)
(वि० इसकी क्रम संख्या २३ है ।)
(च) यहाँ पर यह पंक्तियाँ लुप्त हैं - इनके स्थान में निम्नांकित शब्द किसी
अन्यलेख में-निम्नोपांत में अंकित हैं ।
"भुजकोट्यंशो गुणा भार्द्धाशास्तच्चतुर्थ भांतैः ।
पंचाद्धीं दुखचन्द्रैं विभाजिता व्यासदलगुणिता ।।"
३. तद्ये for (तज्ये) १. संगुणितातफले for (संगुणितात् फ फले)
(वि० क्रमसंख्या २४ अंकित है ।)
(ङ) २३ वां श्लोक निम्नांकित है-
:भुजकोट्यंशोनगुणा भार्द्धाशास्तच्चतुर्थभागोनैः ।
पञ्चद्रींदुखचन्द्रैर्विभाजिता व्यासदलगुणिता ।। २३ ।।"
'तज्ये......जीवा' की क्रमसंख्या २४ है ।
३. तज्ज्ये for (तज्ये) १. तत्फले for (त् फले)