भारतकोश
ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary

आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा

DevanagariHindipublished737 पृष्ठ

पृष्ठ 585, कुल 737 में से

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पृष्ठ 585

( १६६ ) अथ त्रिप्रश्नोत्तराध्यायः पञ्चदशः स्फुटगत्युत्तरमन्या दिशानयाऽप्यूहयेत्प्रश्नम्। योऽह्नपूर्वापरयोस्तुल्यच्छायांगुलाग्रयो बिन्दुं। वीक्ष्याक्रांत्याक्षांशै विना दिशो वेत्ति गणकः सः ॥ १ ॥ त्रिच्छायाग्रज्ञो यः क्रांत्यक्षार्क विना दिशो भ्रमणम्। छायाग्रस्य दिनार्द्धं छायां वा वेत्ति गणकः सः ॥ २ ॥ यः छायाग्रं दृष्ट्वा क्रांत्यक्षज्ञो दिशो विजानाति। शंकुच्छायाभ्रमणे दिक्ज्ञो वा वेत्ति गणकः सः ॥ ३ ॥

१. (घ) १. प्रश्नात् (च) for (प्रश्नम्) २. (वि०—यहाँ पर समाप्तिसूचक चिह्न है)
३. योऽह्न (ग) येह्नः for (योह्न) ४. बिंदू (ग) बिंदुः for (बिंदु)
५. वीक्ष्य (ग) for (वीक्ष्य) ६. विना (ग) for (विना)
(ग) ७. स्फुटगतिरुत्तर for (स्फुटगत्युत्तर)
८. व्यूयत्प्रस्नात् ॥ ५४ ॥ for (प्यूहयेत् प्रश्नम्)
(च) ३. योऽह्न for (योह्न) ५. विक्षय for (वीक्ष्या)
४. बिंदू for (बिंदु) ६. विना for (विना)
(ङ) ३. योऽह्न for (योह्न) ४. विन्दु for (बिंदु)
५. बीक्ष्य for (वीक्ष्या) ७. क्रान्त्यक्षांशै for (क्रान्त्यक्षांशै)
६. विना for (विना)
२. (घ) १. ऋछाया for (त्रिछाया) २. दि श्रद्धे छायां (ग) दिनार्द्धं for (दिनार्द्ध)
(ग) ३. क्रांति क्षार्के विना for (क्रान्त्यक्षार्कं विना)
(च) ३. क्रान्त्यक्षाक्कें for (क्रान्त्यक्षार्कें)
(ङ) १. त्रिच्छाया for (त्रिछाया) ३. क्रान्त्यक्षार्के विना for (क्रान्त्यक्षार्कें विना)
२. दिनार्धच्छायां for (दिनार्द्धं छायां)
३. (ग) १. दिज्ञो for (दिशो) २. “सः” यहाँ यह पद लुप्त है
३. यश्छायाग्रं for (यः छायाग्रं)
(वि० इसकी श्लोक संख्या ४ है। तीन की संख्या का श्लोक लुप्त है ।)
(च) ४. कृत्यक्षज्ञो for (क्रांत्यक्षज्ञो)
(ङ) ३. यश्छायाग्रं for (यः छायाग्रं) १. दिग्ज्ञो for (दिक्ज्ञो)
५. शंकुच्छाया for (शङ्कच्छाया)
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