भारतकोश
ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary

आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा

DevanagariHindipublished737 पृष्ठ

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( २०५ ) लब्धधनु रविरजाक्षं कर्कटकादौ विशोद्ध्ये चक्रार्द्धात् । तज्या तदुदय सममंडलांतरा क्षुज्ययाभक्ता ॥ २२ ॥ प्रह्न सममंडला सुक्रमज्यया संगुणा सकृत्सूर्यः । प्रह्न घटिकाभिरेवं गतघटिकाभिर्भवत्यहः ॥ २३ ॥ त्रिज्यादिनाङ्कसममंडलांतरा सुज्यायाः कृतिविशेषः । स्वविषयविषुवच्छाया वर्गेण गुणो द्विधा प्रथमाः ॥ २४ ॥ व्यासार्द्धवर्गभक्तौ लब्धं द्वादशकवर्ग संयुक्तम् । छेदो द्वितीयराशे लब्धं पदं क्रान्तिरर्कतः ॥ २५ ॥ २२. (घ) १. रजादौ (ग) (च) for (रजाक्षं) २. विशोध्य (ग) (च) for (विशोद्ध) (च) ३. कर्केट for (कर्कट) ४. सुज्यया for (क्षुज्यया) (ड) ५. रिनो for (रवि) १. ऽजादौ for (रजाक्षं)