भारतकोश
ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary

आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा

DevanagariHindipublished737 पृष्ठ

पृष्ठ 598, कुल 737 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 598

( २१२ ) शंकुतलशंकुगणिते त्रिज्ये तद्वर्गयुतिपदविभक्ते । अक्षावलंबज्ये द्युदलस्थेऽर्कन्यदा द्युदलात् ॥ ४८ ॥ छायावृत्तेऽर्कग्रा कर्णगुणा व्यासदल हृताकर्ग्रा । प्राच्यपरा शंकवंतरमुत्तरयाम्यं तदून युता ॥ ४६ ॥ उत्तर गोले याम्ये विषुवच्छायाग्रयांतरं हीनम् । एवं विषुवच्छाया युक्तिविहीनांतरेणाग्रा ॥ ५० ॥ बाहूक्रांतिः कोटिः क्षितिजातद्वर्गयुतिपदं कर्णः । अग्रोदयास्त सूत्राद्दक्षिणतो द्रश्य शंकु तलम् ॥ ५१ ॥ ४८. (घ) १. तद्वंर्ग for (तद्वर्गं) २. अक्षावलंबकज्ये (ग) अक्षावलंबकज्ये (ङ) for (अक्षावलंबज्ये) ३. ऽर्केज्यदा (ग) स्छेऽकेन्यद for (ऽर्कन्यदा) (ग) ४. द्यूदलात् for (द्युदलात्) (च) १. तद्वंर्ग for (तद्वर्गं) २. अक्षावलंबकद्ये for (अक्षावलंबज्ये) ३. ऽर्केऽन्यदा for (ऽर्कदान्यदा) (ङ) ३. ऽर्क्केज्यदा for (ऽर्कन्यदा) ४६. (घ) १. वृत्तऽकर्ग्रा (ग) (ङ) for (वृत्तेऽर्कग्रा) २. हृता for (हृता) (