भारतकोश
ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary

आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा

DevanagariHindipublished737 पृष्ठ

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पृष्ठ 602

? Because in footnote 1: १. (घ) १. ग्रह ... २. छेदकं (च) (ङ) for (छेदकं) ३. क्षतंत्रेषु ... ४. 'तंत्र' ... ५. आचार्यः ... ६. छेदक ... ७. तत् ... ८. वक्ष्ये So the footnote numbers for verse 1 are: १. ग्रहः २. छेदकं ३. क्षीयोगेषु ४. सर्वतन्त्रविदाम् ५. आचार्य ६. छेद्यक ७. ततः ८. वक्षे They are numbered in that order in the footnote: १. (घ) १. ग्रह (ङ) (ग) for (ग्रहः) २. छेदकं (च) (ङ) for (छेदकं) Then (ग) continues with ३, ४, ५, ६, ७, ८! So inline: ग्रहणग्रहसंयोगग्रहः^१ क्षीयोगेषु^३ सर्वतन्त्रविदाम्^४ । आचार्य^५छेद्यक^६ विद्यतस्ततः^७ छेदकं^२ वक्षे^८ ॥ १ ॥ This matches the exact footnote references!

Let's check Verse 2: दुर्जनकृतघ्नशत्रु प्रतिकंचुक करिपतित^१मुखेभ्यः^२ । `छेदक^३मदेयभ्यो^४ददतः^६ सुकृतायुषोनश