ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)
Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary
आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा
DevanagariHindipublished737 पृष्ठ
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( २३५ ) भगणादिशेषमग्रं छे¹दहृ²तं ख चरै⁵ दिनजशेषहृतम्³ । अनयोरग्रं भगणादि दिनजशेषोद्धृतं⁶ द्युगणः⁴ ॥ ८ ॥ अथवा जि²नजभगणादिशेषं येन गुणं मंडलादि शेषोनं³ । शुध्यति विभाजितं स्वेन भागहारेण सद्युगुणः¹ ॥ ६ ॥ मंडल राश्यंशकला विकलाशेषादभीष्टतः¹ कथितान ॥ आनयति दिनगणं यः कु²ठाकारं स जानाति ॥ १० ॥
८. (घ) १. छेदहृतं (ग) (च) (ङ) for (छेदहृतं)
२. खंच (यहां मूल में 'र' नहीं है) for (खचर)
३. हृतम् (च) (ङ) for (हृतम्)
४. क्वगणः (ग) द्युगणः for (द्युगणः)
(ग) ५. च for (चर)
६. भगणादिधृतं for (भगणादिदिनजशेषोद्धृतं)
(वि०—इसकी श्लोक संख्या ७ है) (ङ)
(च) २. खच for (खचर) ४. द्युगणः (ङ) for (द्युगणः)
(वि०—इसकी क्रमसंख्या ७ है)
६. (घ) १. गणः for (गुणः)
(ग) २. यह श्लोक 'दिनज' से आरम्भ होता है, (ङ)
३. शेषकयोः (ङ) for (शेषोनं)
दूसरी पंक्ति बिल्कुल भिन्न है—
"सदृशच्छेदो धृतयोस्तद्घातमहर्गण द्यमतः" ॥८॥
(च) १. सद्युगणः for (सद्युगुणः)
(ङ) २. 'अथवा' लुप्त, दिनज for (जिनज)
दूसरी पंक्ति निम्नांकित—
सहशच्छेदोद्धृतयोस्तद्घातमहर्गणाद्यमनः for (शुध्यति विभाजितं स्वेन
भागहारेण सद्युगुणः)
(वि—इसकी क्रमसंख्या ८ है)
१०. (घ) १. दभीष्टतः कथितान् for (दभीष्टतः कथितान)
२. कुट्टाकारं for (कुठाकारं)
(च) १. दभीष्टतः for (दभीष्टतः) २. कुदाकारं for (कुठाकारं)
(ङ) श्लोक उपलब्ध नहीं।