ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)
Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary
आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा
DevanagariHindipublished737 पृष्ठ
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( २६१ ) विकलाशेषं$^३$ सहितं त्रिवत्याऽङ्डे सप्तषष्टिहीनं$^२$ च भानोर्ज्ञदिने वर्गं कुर्वन्नाबत्सराद् गणकः ॥ ८३ ॥$^४$ ज्ञदिनेऽर्कं$^१$ कलाशेषं$^२$ वर्गो$^३$ द्वादशभिः संयुतं त्रिषष्टचा च । षष्टचाष्टाभिश्चोनं कुर्वन्नात्सराद् गणकः ॥ ८४ ॥ इन्दु$^२$ विलिप्ता शेषं$^१$ मंत्राशेषं वा । अथवा मध्यमिष्टं$^३$ कुर्वन्नावत्सराद् गणकः ॥ ८५ ॥$^४$ जौवविलिप्ता शेषा$^२$ कुजमिंदुं$^१$ भौमलिप्तिका$^३$शेषात् । रवि$^१$मिंदभाग$^४$शेषा$^५$ कुर्वन्नावत्सराद् गणकः$^६$ ॥ ८६ ॥
८३. (घ) (वि०—इसकी क्रमसंख्या ८४ है)
१. ६३ (च) for (८३) २. +६७+ (च)
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