भारतकोश
ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary

आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा

DevanagariHindipublished737 पृष्ठ

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पृष्ठ 649

( २६५ ) तद्वर्गांतरमाद्यं तदंतरं चांतरीद्धृतयुतोनम् । वर्गांतरं विभक्तं ताभ्यां शेषोन्यतो द्युगणः ॥ ६६ ॥ कृतिसंयोगाद्विगुण छेद्ययुतिकृति विशोध्य मूलेन । शेष युतियुत हीनाद्विहता शेषे पृथक् युक्त्या ॥ ६७ ॥ शेषवधाद्विऋतिति गुणा छेषांतरवर्गसंयुतान्मूले । शेषांतरीनैयुक्तं दलितं शेषे पृथगभीष्टे ॥ ६८ ॥

६६. (घ) (वि०—इसकी क्रमसंख्या ६७ है)
१. चांतरोध्दृत (ग) (ङ) for (चांतरीद्धृत)
२. द्वा द्वाभ्यां for (ताभ्यां) ३. शेषे ततो (ग) (ङ) for (शेषोन्यतो)
(च) १ चांतरोद्धृत for (चांतरीद्धृत) ४. (वि०—क्रमसंख्या ६७ है)
३. शेषो ततो द्युगणः for (शेषोन्यतो द्युगणः)
(ङ) ५. माद्यं for (माद्यं) २. द्वाभ्यां for (ताभ्यां)
६७. (घ) (वि०—इसकी क्रमसंख्या ६८ हैं)
१. द्विगुणा (ग) (च) for (द्विगुण)
२. छष for (छेष) (ग) छेष कृतियुति for (छेषयुतिकृति)
३. विहृता (ग) विज्ञता for (द्विहता)
(ग) ४. कृत संयोगा for (कृतिसंयोगा) ५. पृथग्युक्त्या for (पृथक् युक्त्या)
(च) ६. द्विहता for (द्विहता)
६. (वि०—क्रमसंख्या ६८ अंकित)
(ङ) कृतिसंयोगाद् द्विगुणाद्युतिवर्गं प्रोह्य शेषमूलं यत् ।
तेन युतोनो योगो दलितः शेषे पृथगभीष्टे ॥ ६८ ॥
for
(कृतिसंयोगाद्विगुण छेद्ययुतिकृति विशोध्य मूलेन
शेष्युतियुतहीना द्विहता शेषे पृथक् युक्त्या ॥ ६७ ॥)
६८. (घ) (वि—इसकी क्रमसंख्या ६६ है)
१. विकृति (ग) for (द्विऋतिति) मूलम् (ग) (ङ) for (मूले)
३. शेषांतरोन (ग) (ङ) for (शेषांतरीन युक्तं)
४. पृथगभीष्टे (ग) (ङ) for (पृथगभीष्टे)
(ङ) १. कृति for(ऋति) २. मूलं for (मूले)
४. पृथग्भीष्टे for (पृथगभीष्टे)
५. (वि०—क्रमसंख्या ६६ अंकित है)
(ङ) १. वधाद् द्विकृतिगुणात् for (वधाद्विऋतिगुणा) ६. शेषांतर for (छेषान्तर)
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