भारतकोश
ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary

आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा

DevanagariHindipublished737 पृष्ठ

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पृष्ठ 651

( २६७ ) अथ शंकुच्छायादिज्ञानाध्यायः एकोनविंशः दृष्ट्‌वा दिनार्द्धघटिका योर्कजो$^१$ क्षांशकान्वीजा$^३$नाति$^२$ । उदयांतरघटिकाभिर्ज्ञाता$^४$ ज्ञेयं स तन्त्रज्ञः ॥ १ ॥ अस्तांतर्घटिकाभिर्यो$^१$ ज्ञाताज्ज्ञेयमानयति$^६$ तस्मात् । मध्यगति$^२$ ग्रहभगणाननयति$^३$ तया$^४$ स तन्त्रज्ञः ॥ २ ॥ आनयति यस्तमो रविशशांक मानानि दिपं$^१$ कौच्च्यतलात् । शंकुतलांतरभूमिं$^२$ ज्ञाने छायां स तन्त्रज्ञः ॥ ३ ॥ छायाद्वितीयाग्रांतर$^१$ विज्ञाने$^४$ वेत्ति$^२$ दीपोच्च्ये । शंकु छायाज्ञो$^५$ वा$^३$ यच्छायाैच्च्ये स तंत्रज्ञः ॥ ४ ॥

१. (घ) १. ऽर्कज्ञो (ग) (ङ) for (योर्कजो) २. विजानाति (ग) for (वीजानाति)
(च) १. योऽर्क्कजो for (योर्कजो) २. विजानाति for (वीजानाति)
(ङ) ३. ऽक्षांशकान् for (क्षांशकान्) २. विजानाति for (वीजानाति)
४. ज्ञाताज्ज्ञेयं for (ज्ञाता ज्ञेयं)
२. (घ) १. अस्तांतर (ग) for (अस्तांतर्) २. मध्यगतिं (च) (ङ) for (मध्यगति)
(ग) ३. युगम (ङ) for (ग्रहभ) ४. नानयति (च) (ङ) for (ननयति)
५. ततः (ङ) for (तया) (वि०—इसकी क्रम संख्या १ लिखी है)
(च) १. अस्तांतर घटिकाभिर्यो (ङ) for (अस्तांतर्घटिकाभिर्यो)
(ङ) ६. ज्ञाताज्ज्ञेय for (ज्ञाताज्ज्ञेय)
३. (घ) १. दीपाक्चे क्वच्यतलात् (ग) दीपक शिखोन्याः for (दिपकौच्च्यतलात्)
(ग) २. भूमि (ङ) for (भूमिं) (वि०—इसकी क्रमसंख्या २ लिखी है)
(ङ) १. दीपकशिखोच्च्यात् for (दिपकौच्च्यतलात्)
४. (घ) १. छायाद्वितया (ग) for (छायाद्वितीया)
२. भूमिदीपोच्च्ये (ग) दीप्त्यौच्च्ये for (दीपोच्च्ये)
(ग) ३. परभूमेच्छायां for (यच्छायाैच्च्ये) (वि०—इसकी श्लोक संख्या ५ है)
(च) १. द्वितया for (द्वितीया)
(ङ) १. छायाद्वितीयभाग्रान्तर for (छायाद्वितीयाग्रांतर)
४. विज्ञानेन for (विज्ञाने) २. दीपोच्च्यम् for (दीपोच्च्ये)
५. शङ्कुच्छायाज्ञो for (शंकुच्छायाज्ञो) ३. भूमेश्च्छायां for (यच्छायाैच्च्ये)