ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)
Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary
आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा
DevanagariHindipublished737 पृष्ठ
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( २७६ ) अन्यत्र सर्वतो दिशिमुन्नमति^१भयं^२ जरोर्ध्वगो^३ भ्रमति लंकायां^४ । मुहु^५ चक्रं पूर्वापरगं ध्रुवौ क्षितिजे ॥ ५ ॥ देवा सव्यगम सुराः^५ पश्यंत्यपसव्यगं^२ रवि क्षितिजे । विषुवति समपश्चिमगं निरक्ष^३देशा^४स्थिताः पुरुषाः^६ ॥ ६ ॥ • सौम्यमपमण्डलाद्धं^२ मेषाद्यं^३ सव्यगं^४ सदादेवाः । पश्यंति तुलाद्यद्धं दक्षिणमप सव्यगं दैत्याः^१ ॥ ७ ॥ पश्यंति देवदैत्या रविवर्षार्द्धं^३मुदितं सकृत्सूर्यम् । शशिगाः सशि^१मासार्द्धं पितरोभूस्था नराः स्वदिवम्^२ ॥ ८ ॥ भूपरिधि तुर्यभागे^४ लंकाभूमस्तका^६त्क्षितितलाच्च^५ । लंकोत्तरतोवंती^२ भूपरिधेः पंच दशभागैः^३ ॥ ६ ॥ [L1