ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)
Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary
आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( २८५ ) असकृन्मांदे^१ तत्फलमाद्यसमं^३ नात्र कर्णोस्मात्^४ । प्रतिपादनार्थमुच्चं^२ प्रकल्पितं ग्रहगतेस्तथा पातः ॥ २६ ॥ भुक्तेरूनाधिकनामानस्यच भवति कर्णवशात् । कक्ष्या^३ व्यासाद्धर्धगुणा मंडललिप्ता विभाजिताकर्णः ॥ ३० ॥ स्वकलाकर्णेन गुणः कर्णस्त्रिज्याहतः^१ स्पष्टः । मह्दहन^२ जलमयानं^४ विष्कंभो योजनैः कनेंदुना^३ ॥ ३१ ॥ २६. (घ) १. असकृन्मां (ग)^१ असकृन्मान्धे for (असकृत् मांदे) २. प्रतिपदेनार्थमुच्चं for (प्रतिपादनार्थमुच्चं) (ग) ३. सम for (ममं) ४. कर्णोस्मात् ॥ २६ ॥ (ङ) for (कर्णोस्मात्) इस श्लोक का उत्तरार्ध, ३० वें श्लोक का पूर्वार्ध है । (च) १. असकृन्मांदे for (असकृत्मांदे) ४. कर्णोस्मात् for (कर्णोस्मात्) (ङ) २. असकृन्मान्दे for (असकृत्मांदे) ३०. (घ) १. तामानस्य (ग) for (नामानस्य) (ग) २. व स्यात् ॥ ३० ॥ for (वशात्) ३. कक्षा (ङ) for (कक्ष्या) इस श्लोक का उत्तरार्ध, ३१ वें श्लोक का पूर्वार्ध है । (च) १. तामानस्य for (नामानस्य) (ङ) १. रूनाधिकता for (रूनाधिकना) ४. + इति स्फुटगतिवासना + ३१. (घ) १. हृतः (ग) हृतस्पष्टः ॥ ३१ ॥ for (हतः) २. मृद्दहन (ग) (ङ) for (मह्दहन) ३. किनेन्दूनाम् (ग) केनेदूनाम् for (कनेंदुना) (ग) ४. मायानां for (मयानं) इस श्लोक की दूसरी पंक्ति अगले श्लोक की पहली पंक्ति है । (च) हृतः for (हतः) २. मृद्दहन (ङ) for (मह्दहन) ४. जलमयानां (ङ) for (जलमयानं) ३. किनेंदुनां for (कनेंदुना) (ङ) ५. विष्कंभो for (विष्कंभा) ३. द्विनेंदूनां for (कनेंदुना)