ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)
Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary
आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा
DevanagariHindipublished737 पृष्ठ
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( २६३ ) ⁵जिनभागै¹र्याम्येन मृगादावपमंडलमिहार्कः² । पातश्चंद्रादिनां³ भ्रमंति⁶ भार्द्धे⁴ खेश्च भूछाया ॥ ५२ ॥⁷ ¹पातदयमंडल वह्नि मंडलानि³ स्वविक्षेपैः² । सौम्यं विमंडलाद्धं प्रथमं याम्यं द्वितीयमेतेषु⁴ ॥ ५३ ॥५ चन्द्रकुज जीवमंदा भ्रमंति शीघ्रेण बुधशुक्रौ¹ । दृग्मंडलाद्धं मूर्द्धं³ यत्तत्परिधि स्थितं ग्रहं द्रष्टाः² ॥ ५४ ॥४ पश्यति यतः क्षितिस्थस्तद्भ्रमति² ततो ग्रहाभिमुखं¹ । क्षितिजापमंडलद्युतिर्लग्नं लग्नाग्रतो³ दिशंवलनं⁵ ॥ ५५ ॥⁴
५२. (ख) १. र्घमोन for (र्याम्येन)
२. (वि०— यहां क्रमसंख्या ५२ दी हुई है) (ग) (च)
३. पाताश्चंद्रादीनां (ग) (ङ) for (पातश्चन्द्रादिनां)
४. भार्द्ध for (भार्द्धं) (ग) ५. निज for (जिन)
६. भ्रमंते for (भ्रमंति)
(वि०— इस श्लोक का उत्तरार्ध ५३ वें श्लोक का पूर्वार्ध है) (च)
(च) ३. पाताश्चंद्रादीनां for (पातश्चन्द्रादिनां) ७. क्रमसंख्या लुप्त
५३. (घ) १. पातादषमंडल (ग) पातादपमंडलवत् for (पातदयमंडलवद्)
२. (वि०— यहां क्रमसंख्या ५३ दी है) (ग) (च)
(ग) ३. विमंडनानि for (द्विमंडलानि)
(वि०— इस श्लोक का उत्तरार्ध ५४ वें श्लोक का पूर्वार्ध है) (च)
४. द्वितीयामातष्ट for (द्वितीयमेतेषु)
(च) १. पातदपमंडल for (पातदयमंडल) ५. क्रमसंख्या लुप्त
(ङ) १. पाताद्वपमंडलवद् for (पातदयमंडलवद्)
५४. (घ) १. (वि०— यहां क्रमसंख्या ५४ दी है) (ग) (च)
२. द्रष्टा (ग) दृष्टा for (द्रष्टाः) (ग) ३. मूर्द्ध for (मूर्द्धं)
(वि०— इस श्लोक का उत्तरार्ध ५५ वें श्लोक का पूर्वार्ध है) (च)
(च) २. द्रष्टा for (द्रष्टाः) ४. क्रमसंख्या लुप्त
(ङ) ३. मूर्द्ध्वं for (मूर्द्धं) २. द्रष्टा for (द्रष्टाः)
५५. (घ) १. (वि०— यहां क्रमसंख्या '५५' दी गई है) (ग) (च)
(ग) २. तद्धमति for (तद्भ्रमति) ३. यादिशं for (तोदिशं)
(वि०— इस श्लोक का उत्तरार्ध ५६ वें श्लोक का पूर्वार्ध है) (च)
(च) ४. क्रमसंख्या लुप्त (ङ) ३. लग्नाग्रया for (लग्नाग्रतो)
५. दिशा लग्नम् for (दिशंवलनं)