भारतकोश
ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary

आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा

DevanagariHindipublished737 पृष्ठ

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( ३०८ ) मित्वाग्रै$^१$हैकदेशे$^६$ विद्धे$^७$ष्टं शलाकया न्या$^८$सर्वम् । प्रथमशलका$^२$भक्तं मीत$^३$ द्वितीया$^४$ गुणितमौच्यम्$^५$ ॥ ३३ ॥ षष्ट्याहूता$^१$ शलाका त्रिज्याघात$^२$ धनु गृहांतर्कं$^३$ । यैरूक्तं$^४$ मूर्खस्ते यतो न द्रष्टघंतरं$^५$ द्रग्ज्या$^६$ ॥ ३४ ॥ मूलेद्वं$^१$गुलविपुलः$^५$ शुच्यग्रो$^२$ द्वादशांगुलोच्छ्रायः$^८$ । शंकुतलाग्र$^३$विद्धोग्रवेध$^६$ लम्बा$^७$द्धार्यः$^४$ ॥ ३५ ॥

३३. (घ) १. गृहैक (ग) (च) (ङ) for (ग्रहैक) (वि०-इसकी क्रमसंख्या ३४ है)
२. शलाका (ग) शिलाका for (शलका)
३. मिति (ग) मितं (ङ) for (मीत