भारतकोश
ब्रह्मसूत्र (शाङ्करभाष्य सहित)

ब्रह्मसूत्र (शाङ्करभाष्य सहित)

Brahma Sutras with Shankara Bhashya - Gita Press

महर्षि बादरायण / आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: गीताप्रेस गोरखपुर · गीताप्रेस गोरखपुर · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished417 पृष्ठ

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सूत्र २१—२२ ] अध्याय ४ ३८३ अनावृत्तिः=ब्रह्मलोकमें गये हुए आत्माका पुनरागमन नहीं होता; शब्दात्=यह बात श्रुतिके वचनसे सिद्ध होती है; अनावृत्तिः=पुनरागमन नहीं होता; शब्दात्=यह बात श्रुतिके वचनसे सिद्ध होती है । व्याख्या—श्रुतिमें बार-बार यह बात कही गयी है कि ब्रह्मलोकमें गया हुआ साधक वापस नहीं लौटता (बृह० उ० ६ । २ । १५; प्र० उ० १ । १०; छा० उ० ८ । ६ । ६; ४ । १५ । ६; ८ । १५ । १) । इस शब्द-प्रमाणसे यहाँ सिद्ध होता है कि ब्रह्मलोकमें जानेवाला अधिकारी वहाँसे इस लोकमें नहीं लौटता । ‘अनावृत्तिः शब्दात्’ इस वाक्यकी आवृत्ति ग्रन्थकी समाप्ति सूचित करनेके लिये है। चौथा पाद सम्पूर्ण । श्रीवेदव्यासरचित वेदान्तदर्शन ( ब्रह्मसूत्र ) का चौथा अध्याय पूरा हुआ । वेदान्त-दर्शन सम्पूर्ण ।