बृहदारण्यकोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

बृहदारण्यकोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)
Brihadaranyaka Upanishad with Shankara Bhashya
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished1,402 पृष्ठ
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तत्सद्ब्रह्मणे नमः
बृहदारण्यकोपनिषद्
मन्त्रार्थ, शाङ्करभाष्य और भाष्यार्थसहित
शङ्करः शङ्कराचार्यः सद्गुरुः शर्वसन्निभः ।
सर्वेषां शङ्कराः सन्तु सच्चिदानन्दरूपिणः ॥
शान्तिपाठ
ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते ।
पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ॥
ॐ शान्तिः ! शान्तिः !! शान्तिः !!!
ॐ वह (परब्रह्म) पूर्ण है और यह (कार्यब्रह्म) भी पूर्ण है; क्योंकि पूर्णसे पूर्णकी ही उत्पत्ति होती है। तथा [प्रलयकालमें] पूर्ण (कार्यब्रह्म) का पूर्णत्व लेकर (अपनेमें लीन करके) पूर्ण (परब्रह्म) ही बच रहता है। त्रिविध तापकी शान्ति हो।