भारतकोश
बृहन्नारदीय पुराण (संस्कृत मूल व हिन्दी व्याख्या)

बृहन्नारदीय पुराण (संस्कृत मूल व हिन्दी व्याख्या)

Brihan Naradiya Purana with Sanskrit & Hindi Commentary

महर्षि व्यास द्वारा

स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,008 पृष्ठ

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प्रकाशकीय यथा श्रेष्ठा नदी गङ्गा पुष्करं च सरो यथा । ⊙ ⊙ ⊙ ⊙ ⊙ ⊙ ⊙ ⊙ ⊙ ⊙ ⊙ ⊙ ⊙ तथैव नारदीयं तु पुराणेषु प्रकीर्तितम् ॥ (ना० पु० अ० १२५) हर्ष को बात है कि हमारो पुराण-प्रकाशन योजना का कार्य 'श्रेयांसि बहुविघ्नानि' के रहते हुए भी सुचारु रूप से चल रहा है । भगवान् की कृपा बनी रही तो आगामी कुछ वर्षों में और भी कतिपय पुराण जनताजना- र्दन के करकमलों में पहुँचा देंगे । सम्प्रति बृहन्नारदीयपुराण (पूर्वभाग) हम प्रस्तुत कर रहे हैं । वैसे तो इस महापुराण में छन्द, ज्योतिष, तन्त्र, मन्त्र, वेदान्त आदि विविध विषयों पर अच्छा प्रकाश डाला गया है, पर त्रिस्कन्ध ज्योतिष का विवरण बहुत प्रामाणिक एवं सटीक है । 'हाथ कंगन को आरसी क्या', पाठक गण स्वयं इसे पढ़कर अनुभव करेंगे । इस महापुराण का अनुवाद आज से ४० वर्ष पूर्व सम्मेलन के प्राण स्वनामधन्य बाबू पुरुषोत्तमदास टण्डन की अभिप्रेरणा से सम्मेलन ने कराया था । इस अन्तराल में सम्मेलन को कितनी उच्चावच स्थिति को देखना पड़ा, यह प्रबुद्ध जनता से छिपी हुई बात नहीं है । सम्मेलन की अक्ष्य स्थिति में पुराण-प्रकाशन-कार्य बन्द कर दिया गया था । आदाता काल के बाद पुनर्मन्त्रिमण्डल काल में हमने इस कार्य को पुनरुज्जीवित किया । तबसे कई पुराणों का सुचारु प्रकाशन अब तक हो चुका है । प्रकाशन-क्रम में यह छठा पुष्प (बृहन्नारदीय पुराण का प्रकाशन) पाठकों को समर्पित है । इस पुराण का अनुवाद कार्य दो अनुवादकों ने पूर्ण किया था । इस पुराण में कुल २०७ अध्याय हैं, जिनमें अध्याय १ से ५३ तक डॉ० घनश्याम त्रिपाठी ने अनुवाद किया और अध्याय ५४ से २०७ तक (कुल १५४ अध्यायों का) अनुवाद आचार्य प्रवर श्री तारिणीश झा ने किया । साथ ही संशोधन-सम्पादन कार्य भी श्री झा ने सम्पन्न किया है । अतएव हम उन्हें धन्यवाद ज्ञापित करते हैं और इस बृहत् कार्य को सम्पन्न करने में श्री झा के सहयोगी पण्डित श्री रुद्रप्रसाद मिश्र, श्री हरिमोहन पाण्डेय और विशेषकर साहित्य विभागाध्यक्ष श्री हरिमोहन मालवीय के प्रति हम धन्यवाद व्यक्त करते हैं । विश्वास है, सहृदय पाठकगण हमारे इस महत्त्वपूर्ण प्रकाशन को अपनाकर हमें प्रोत्साहित करेंगे । महाकुंभ पर्व डॉ प्रभात शास्त्री संवत् २०४५ प्रधान मंत्री हिन्दी-साहित्य, सम्मेलन, प्रयाग १२, सम्मेलन मार्ग, इलाहाबाद ।