बृहन्नारदीय पुराण (संस्कृत मूल व हिन्दी व्याख्या)
Brihan Naradiya Purana with Sanskrit & Hindi Commentary
महर्षि व्यास द्वारा
स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)
पृष्ठ 845, कुल 1008 में से
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८२६ नारदीयपुराणम् तथा वैपुरकंदाख्या ज्ञात्रादिविविधात्मिका । आयुर्लक्ष्मीकीर्तिभोगसौंदर्यारोग्यदायिका ॥१०५॥ ऐहिकामुष्मिकज्ञानमयी च परिकीर्तिता । जीवाख्या विजयाख्या च तथैव विश्वविन्मयी ॥१०६॥ हृदादिविद्या रूपादिभानुरूपाः जगद्वपुः । विश्वमोहनिका चैव त्रिपुरामृतसंज्ञिका ॥१०७॥ सर्वाप्यायनरूपा च मोहिनी क्षोभणी तथा । क्लेदिनो चापि षट्कूटा पंचकूटा विशुद्धगा ॥१०८॥ संपत्करी हलक्षार्णा सीमामातृतनु रतिः । प्रीतिर्मनोभवा वापि प्रोक्ता वाराधिपा तथा ॥१०९॥ विकटा चापि षट्कूटा पंचकूटा विशुद्धगा । अनाहतगता चैव मणिपूरकसंस्थिता ॥११०॥ स्वाधिष्ठानसमासीनाधारस्थाज्ञासमास्थिता । षट्त्रिंशत्कूटरूपा च पंचाशन्मिथुनात्मिका ॥१११॥ पादुकादिकसिद्धीशा तथा विजयदायिनी । कामरूपप्रदा वेतालरूपा च पिशाचिका ॥११२॥ विचित्रा विभ्रमा हंसी भीषणी जनरंजिका । विशाला मदना तुष्टा कालकंठी महाभया ॥११३॥ माहेंद्री शंखिनी चैंद्री मंगला वटवासिनी । मेखला सकला लक्ष्मीर्मालिनी विश्वनायिका ॥११४॥ सुलोचना सुशोभा च कामदा च विलासिनी । कामेश्वरी नंदिनी च स्वर्णरेखा मनोहरा ॥११५॥ प्रमोदा रागिणी सिद्धा पद्मिनी च रतिप्रिया । कल्याणदा कलादक्षा ततश्च सुरसुन्दरी ॥११६॥ विभ्रमा वाहका वीरा विकला कोरका कविः । सिंहनादा महानादा सुग्रीवा मर्कटा शठा ॥११७॥ विडालाक्षा विडालास्या कुमारी खेचरी भवा । मयूरा मंगला भीमा द्विपवक्त्रा खरानना ॥११८॥ मातंगी च निशाचारा वृषग्राहा वृकानना । सैरिभास्या गजमुखा पशुवक्त्रा मृगानना ॥११९॥ क्षोभका मणिभद्रा च क्रीडका सिंहचक्रका । महोदरा स्थूलशिखा विकृतास्या वरानना ॥१२०॥ चपला कुक्कुटास्या च पाविनी मदनालसा । मनोहरा दीर्घजंघा स्थूलदन्ता दशानना ॥१२१॥ सुमुखा पंडिता क्रुद्धा वराहास्या सटामुखा । कपटा कौतुका काला किंकरा कितवा खला ॥१२२॥ भक्षका भयदा सिद्धा सर्वांगा च प्रकीर्तिता । जया च विजया दुर्गा भद्रा भद्रकरी तथा ॥१२३॥
रूपादिभानुरूपा, जगद्वपु, विश्वमोहनिका, त्रिपुरामृतसंज्ञिका, सबको संवर्धित करनेवाली, मोहिनी, क्षोभिणी, क्लेदिनी, महोदया, संपत्करी, ह, ल एवम् क्ष वर्णों वाली, सीमा, मातृतनु, रति, प्रीति, मनोभवा, वाराधिपा, त्रिकूटा, षट्कूटा, पंचकूटा, विशुद्धगा, अनाहत चक्र में जानेवाली, मणिपूरक में संस्थित होनेवाली, अपने अधि- ष्ठान में संस्थित होने वाली, अपने आंष्ठान में आसोन होने वाली, आधार चक्र तथा आज्ञा चक्र में आस्थित होने वाली, छत्तीस कूटवाली, पचास मिथुन वाली, पादुका आदि सिद्धियों की ईश्वरी, विजयदायिनी, कामरूपप्रदा, बेतालरूपा, पिशाचिका, विचित्रा, विभ्रमा, हंसी, भीषणी, जनरंजिका, विशाला, मदना, तुष्टा, कालकंठी, महाभया, ॥१०७-११३॥ माहेंद्री, शंखिनी, ऐंद्री, मंगला, वटवासिनी, मेखला, सकला, लक्ष्मा, मालिनी, विश्व- नायिका, सुलोचना, सुशोभा, कामदा, विलासिनी, कामेश्वरी, नंदिनी, स्वर्णरेखा, मनोहरा, प्रमोदा, रागिणी सिद्धा, पद्मिनी, रतिप्रिया, कल्याणदा, कलादक्षा, सुरसुन्दरी, विभ्रमा, वाहका, वीरा, विकला, कोरका, कवि, सिंहनादा, महानादा, सुग्रीवा, मर्कटा, शठा, बिडालाक्षा, बिडालास्या, कुमारा, खेचरी, भवा, मयूरा, मंगला, भीमा, व्याघ्रमुखा, खरानना, मातंगी, निशाचरा, वृषग्राहा, वृकानना, महिषानना, गजमुखा, पशुवक्त्रा, मृगानना, क्षोभका, मणिभद्रा, क्रीडका, सिंहचक्रका, महोदरा, स्थूलशिखा, विकृतास्या, वरानना ॥११४-१२०॥ चपला, कुक्कुटास्या, पावती, मदनालसा, मनोहरा, दीर्घजंघा, स्थूलदन्ता, दशानना, सुमुखा, पंडिता, क्रुद्धा, वाराहास्या, जटामुखा, कपटा, कौतुका, काला, किंकरा, कितवा, खला, भक्षका, भयदा, सिद्ध, सर्वांगा, जया