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भारतकोश
बृहन्नारदीय पुराण (संस्कृत मूल व हिन्दी व्याख्या)

बृहन्नारदीय पुराण (संस्कृत मूल व हिन्दी व्याख्या)

Brihan Naradiya Purana with Sanskrit & Hindi Commentary

महर्षि व्यास द्वारा

स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,008 पृष्ठ

पृष्ठ 923, कुल 1008 में से

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पृष्ठ 923

अष्टाधिकशततमोऽध्यायः ब्रह्मोवाच मरीचे शृणु वक्ष्यामि पुराणं गारुडं शुभम् । गरुडायाब्रवीत्पृष्टो भगवान्गरुडासनः ॥१॥ एकोनविंशसाहस्रं तार्क्ष्यकल्पकथान्वितम् । पुराणोपक्रमप्रश्नः सर्गः संक्षेपतस्ततः ॥२॥ सूर्यादिपूजनविधिर्दीक्षाविधिस्ततः परम् । श्राद्धपूजा ततः पश्चान्नवव्यूहार्चनं द्विज ॥३॥ पूजाविधानं च तथा वैष्णवं पंजरम् ततः । योगाध्यायस्ततो विष्णोर्नामसाहस्रकीर्तनम् ॥४॥ ध्यानं विष्णोस्ततः सूर्यपूजा मृत्युंजयार्चनम् । मालामंत्रः शिवार्चाथ गणपूजा ततः परम् ॥५॥ गोपालपूजा त्रैलोक्यमोहनश्रीधरार्चनम् । विष्ण्वर्चा पंचतत्त्वार्चा चक्रार्चा देवपूजनम् ॥६॥ न्यासादिसंध्योपास्तिश्च दुर्गाार्चाथ सुरार्चनम् । पूजा माहेश्वरी चातः पवित्रारोपणार्चनम् ॥७॥ मूर्तिध्यानं वास्तुमानं प्रासादानां च लक्षणम् । प्रतिष्ठा सर्वदेवानां पृथक्पूजा विधानतः ॥८॥ योगोऽष्टांगो दानधर्माः प्रायश्चित्तविधिक्रिया । द्वीपेशनरकाख्यानं सूर्यव्यूहश्च ज्योतिषम् ॥९॥ सामुद्रिकं स्वरज्ञानं नवरत्नपरीक्षणम् । माहात्म्यमथ तीर्थानां गयामाहात्म्यमुत्तमम् ॥१०॥ ततो मन्वंतराख्यानं पृथक्पृथग्विभागशः । पित्राख्यानं वर्णधर्मा द्रव्यशुद्धिः समर्पणम् ॥११॥ श्राद्धं विनायकस्यार्चा ग्रहयज्ञस्तथा श्रमाः । जननाख्यं प्रेतशौचं नीतिशास्त्रं व्रतोक्तयः ॥१२॥ अध्याय १०८ गरुड़पुराण की विषयानुक्रमणी ब्रह्मा बोले-वत्स मरीचे ! सुनो, मैं पवित्र गरुडपुराण को बतलाता हूँ। पूछे जाने पर भगवान् श्री कृष्ण ने यह पुराण गरुड से कहा था। यह तार्क्ष्यकल्प की कथा से युक्त एवं उन्नीस हजार श्लोकों से परिपूर्ण है। इसके पूर्व खंड में पुराणोपक्रम का प्रश्न, संक्षेप से सृष्टि वर्णन, सूर्यादिपूजन विधि, 'दीक्षाविधि, श्राद्धपूजा, नव व्यूहादि अर्चना, पूजा-विधान, वैष्णवपंजर, योगाध्याय, विष्णुसहस्रनाम, विष्णुध्यान, सूर्यपूजा, मृत्युंजय की आराधना, मालामंत्र, शिवार्चा, गणपूजा ॥१-५॥ गोपालपूजा, त्रैलोक्यमोहनश्रीधरार्चन, विष्णुपूजा, पंचतत्त्वों की अर्चा, चक्रार्चन, देवपूजन, न्यासादि, संध्योपासन, दुर्गाार्चा, सुरार्चन, माहेश्वरीपूजा, पवित्रारोपणार्चन, मूर्तिध्यान, वास्तुमान, प्रासादों का लक्षण, सकल देवों की प्रतिष्ठा तथा पृथक्-पृथक् पूजाविधान, अष्टांगयोग, दानधर्म, प्रायश्चित्तविधि, द्वीपेश तथा नरकों का आख्यान, सूर्यव्यूह, ज्योतिष, सामुद्रिक, स्वरज्ञान, नवरत्नपरीक्षण, तीर्थमाहात्म्य, उत्तम गयामाहात्म्य, पृथक्-पृथक् रूप से मन्वन्तराख्यान, पित्राख्यान, वर्णधर्म, द्रव्यशुद्धि, समर्पण ॥६-११॥ श्राद्ध, गणेशपूजन, ग्रहयज्ञ, आश्रम, जन्माख्यान, प्रेतशौच, नीतिशास्त्र, व्रतविधान, सूर्यवंश, सोमवंश, हरि