बार्हस्पत्य सूत्र / अर्थशास्त्र (महर्षि बृहस्पति - प्राचीन दण्डनीति, राजधर्म एवं कूटनीति सटीक)

बार्हस्पत्य सूत्र / अर्थशास्त्र (महर्षि बृहस्पति - प्राचीन दण्डनीति, राजधर्म एवं कूटनीति सटीक)
Brihaspati Sutra or Barhaspatya Rajanitishastra with Commentary
महर्षि बृहस्पति (सम्पादक: डॉ. एफ. डब्ल्यू. थॉमस) द्वारा
DevanagariHindipublished100 पृष्ठ
पृष्ठ 33, कुल 100 में से
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ओ३म् अथ बार्हस्पत्यसूत्रम् । [ प्रथमोऽध्यायः । ] बृहस्पतिरथाचार्य इन्द्राय नीतिसर्वस्वमुपदिशति । आत्मवान् राजा ॥१॥ आत्मवन्तं मन्त्रिणमापादयेत् ॥२॥ दण्डनीतिरेव विद्या ॥३॥ धर्ममपि लोकविक्रुष्टं न कुर्यात् ॥४॥ करोति चेदाशास्यैनं¹ बुद्धिमद्भिः ॥५॥ समानैः सेव्यः ॥६॥ स्त्रीबालवृद्धैः सह न² वदेद्धर्मनीतिकृत्यानि ॥७॥ ऐन्द्रजालिकं³ न कुर्यात् ॥८॥ मन्त्रवादोत्सवौ च ॥९॥ आमयविषध्वंसनानि च ॥१०॥ न भस्मधारणम्⁴ ॥११॥
- W अशास्येनः। 2. W र। 3. W ०जालकं। 4. M erases 11 and inserts it after 12.