भारतकोश
बार्हस्पत्य सूत्र / अर्थशास्त्र (महर्षि बृहस्पति - प्राचीन दण्डनीति, राजधर्म एवं कूटनीति सटीक)

बार्हस्पत्य सूत्र / अर्थशास्त्र (महर्षि बृहस्पति - प्राचीन दण्डनीति, राजधर्म एवं कूटनीति सटीक)

Brihaspati Sutra or Barhaspatya Rajanitishastra with Commentary

महर्षि बृहस्पति (सम्पादक: डॉ. एफ. डब्ल्यू. थॉमस) द्वारा

DevanagariHindipublished100 पृष्ठ

पृष्ठ 57, कुल 100 में से

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पृष्ठ 57

[ चतुर्थोऽध्यायः । ] ब्राह्मे मुहूर्ते उत्थानम् ॥१॥ धर्ममर्थञ्च चिन्तयेत् ॥२॥ कुक्कुटशब्दं¹ शुभम् ॥३॥ गजादिदर्शनञ्च ॥४॥ गजशब्दमङ्गलस्तुतिवेदपाठनञ्च ॥५॥ देवतापुण्यकथा च ॥६॥ राजन्यस्मरणञ्च ॥७॥ नेत्राञ्जनञ्च ॥८॥ आदर्शदर्शनञ्च ॥९॥ अलङ्कारयेत् ॥१०॥ ताम्बूलचर्वणं च ॥११॥ कर्पूरचन्दनागुरुधूपञ्च ॥१२॥ शाङ्खकाहलविषाणा²ञ्छिन्नवेणुवीणातन्त्री³ मृदङ्गपणवाः ॥१३॥ तूर्यघोषाश्च⁴ ॥१४॥ दिव्यप्रमदादर्शनं च ॥१५॥ [१६ ख] मागधभिन्नषड्जं च ॥१६॥

  1. W कुक्कुटे शब्दम् (Sic neut.) 2. M ०निषाण० ।
  2. M W ०तण्डी० । 4. W ०ष्यश् ।
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