बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअथ धनयोगाध्यायः २२९ भानुक्षेत्रगते लग्ने तस्मिन् भानौ स्थिते यदि। भौमेन गुरुणा युक्ते दृष्टे वा स्याद्युतो धनैः॥७॥ सूर्य की राशि जन्मलग्न हो और सूर्य युत हो और मंगल गुरु से युत वा दृष्ट हो तो धनी होता है॥७॥ चन्द्रक्षेत्रगते लग्ने तस्मिंश्चन्द्रयुते यदि। जीवभौमयुते दृष्टे जातोऽवश्यं धनी भवेत् ॥८॥ चंद्रमा की राशि लग्न में हो और चंद्रमा से युत हो और गुरु-भौम से युत-दृष्ट हो तो धनी होता है॥८॥ भौमक्षेत्रगते लग्ने तस्मिन्भौमयुते यदि। सोमशुक्रार्कजैर्दृष्टे युक्ते श्रीमान्नरो भवेत् ॥९॥ मंगल की राशि लग्न में हो और उसमें भौम युत हो और बुध, शुक्र शनि से दृष्ट-युत हो तो धनी होता है॥९॥ गुरुक्षेत्रगते लग्ने तस्मिन् गुरुयुते यदि। सौम्यभौमयुते दृष्टे यातो यस्तु धनीश्वरः ॥१०॥ गुरु की राशि लग्न में हो और उसमें गुरु युत हो और बुध-भौम से दृष्ट-युत हो तो धनी होता है॥१०॥ बुधक्षेत्रगते लग्ने तस्मिन् सौम्ययुते यदि। शनिशुक्रयुते दृष्टे जातो यस्तु धनी नरः ॥११॥ बुध की राशि लग्न में हो और उसमें बुध युक्त हो और शनि-शुक्र से युत-दृष्ट हो तो धनी होता है॥११॥ भृगुक्षेत्रगते लग्ने तस्मिन् भृगुयुते यदि। शनिसौम्ययुते दृष्टे जातो यस्तु धनी भवेत् ॥१२॥ शुक्र की राशि लग्न में हो और शुक्र युत हो और शनि-बुध से युत- दृष्ट हो तो धनी होता है॥१२॥ ये ये ग्रहा धर्मपबुद्धिपाभ्यां युक्ताऽथ दृष्टाश्च सुखप्रदास्ते। रन्ध्रेश्वरादिव्ययपैर्युताः स्युः शोकप्रदा मारकनायकैश्च ॥१३॥ जो-जो ग्रह भाग्येश, पंचमेश से युत-दृष्ट होते हैं वे अपने दशा अंतर में शुभफलद होते हैं और जो अष्टमेश, षष्ठेश और व्ययेश से युत होते हैं वे तथा मारकेश अपने समय में दुःखद होते हैं॥१३॥