भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

पृष्ठ 24, कुल 800 में से

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२६ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् आदौ चतुष्पादन्ते च द्विपदो जलगो मतः॥२०॥ मकर राशि तमोगुणी, भूतत्त्व, दक्षिण दिशा का स्वामी, रात्रिबली है॥१९॥ पृष्ठोदयी, बड़ा शरीर, जलीय भूमि में चलनेवाली, पूर्वार्ध चतुष्पद और उत्तरार्ध द्विपद, जल में रहने वाली है और शनि स्वामी हैं॥२०॥ अथ कुम्भराशिस्वरूपम्- कुम्भः कुम्भी नरो बभ्रुः वर्णमध्यतनुर्द्विपात्। द्युवीर्यो जलमध्यस्थो वातशीर्षोदयी तमः॥२१॥ शूद्रः पश्चिमदेशस्य स्वामी दैवाकरिः स्मृतः। कुम्भ राशि- घड़ा लिये हुए, पुरुष नेवले के रंग के जैसा (भूरा) वर्ण, मध्यम शरीर, द्विपद, दिवाबली, जल में रहने वाली (जलचर), वायु प्रकृति, शीर्षोदयी तम प्रकृति है॥२१॥ शूद्रवर्ण, पश्चिम देश वा दिशा का स्वामी है और शनि स्वामी हैं। अथ मीनराशिस्वरूपम्- मीनौ पुच्छास्य संलग्नौ मीनराशिर्दिवाबली॥२२॥ जली सत्त्वगुणाढ्यश्च स्वस्थो जलचरो द्विजः। अपदो मध्यदेही च सौम्यस्थो ह्युभयोदयी॥२३॥ मीनराशि- दो मछलियों में एक का मुख दूसरे की पूँछ में लगा हुआ स्वरूप, दिन में बली हैं॥२२॥। जलचर, सतोगुणी, ब्राह्मण वर्ण, चरण हीन, मध्यम शरीर, उत्तर दिशा का स्वामी, उभयोदयी है॥२३॥ सुराचार्याधिपश्चास्य राशीनां गदितं मया। त्रिंशद्भागात्मकः स्थूलसूक्ष्माकरफलाय च॥२४॥ गुरु स्वामी हैं। इस प्रकार मैंने ३० अंश के राशियों का स्वरूप कहा, इनके स्थूल और सूक्ष्म फल ग्रन्थों में कहे हुए हैं॥२४॥ इति पाराशरहोरायां पूर्वखण्डे सुबोधिन्यां राशिस्वरूपाध्यायः द्वितीयः॥२॥ अथ ग्रहस्वरूपाध्यायः॥३॥ पराशर उवाच- कालात्मा च दिवानाथो मनः कुमुदबान्धवः। सत्त्वं कुजो विजानीयाद्बुधो वाणीप्रदायकः॥१॥

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