बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
DevanagariHindipublished800 पृष्ठ
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अथ पिंडोत्पत्त्याध्यायः ३३३ लग्नाष्टकवर्गशोधम्
| जन्मकालीन ग्रहाः | चं. शु. | सू. | बु. बृ. | श. | मं. | योग | |||||||
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| राशयः | १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | - |
| रेखाः | ६ | ३ | ५ | २ | ५ | ५ | ३ | ६ | ३ | ४ | ४ | ३ | ४९ |
| त्रिकोण-शोधन | ३ | ० | २ | ० | २ | २ | ० | ४ | ० | १ | १ | १ | १६ |
| एकाधिपत्य शोधन | ० | ० | ० | ० | २ | ८ | ० | ४ | ० | ० | १ | १ | ८ |
| राशिगुणन फल | ० | ० | ० | ० | २० | ० | ० | ३२ | ० | ० | ११ | १२ | राशिपिंड ७५ |
| ग्रहगुणन फल | ० | १० | २० | ८ | ग्रहपिंड ३८ |
प्रत्येक अष्टकवर्गों में मेषादि राशियों में कितनी-कितनी रेखायें प्राप्त हुई हैं और उनका योग क्या हुआ इत्यादि बातों को जानने के लिए सर्वाष्टक- वर्ग चक्र दिया जाता है— सर्वाष्टकवर्गचक्रम्
| राशयः | १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | योग |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सूर्याष्टकवर्ग | ५ | ५ | ४ | ३ | ४ | २ | ४ | ५ | ६ | ३ | ३ | ४ | ४८ |
| चन्द्राष्टकवर्ग | ५ | ३ | ५ | २ | ४ | ३ | ४ | ५ | ५ | २ | ४ | ७ | ४९ |
| भौमाष्टकवर्ग | ३ | ५ | ४ | २ | ३ | ३ | २ | ६ | ३ | ४ | २ | २ | ३९ |
| बुधाष्टकवर्ग | ४ | ४ | ६ | ५ | ५ | ४ | ४ | ५ | ४ | ५ | ४ | ४ | ५४ |
| गुर्वष्टकवर्ग | ६ | ५ | ३ | ३ | ५ | ४ | ६ | ५ | ४ | ४ | ६ | ५ | ५६ |
| शुक्राष्टकवर्ग | ६ | ४ | ७ | ४ | ४ | ४ | ४ | १ | ३ | ६ | ५ | ४ | ५२ |
| शन्यष्टकवर्ग | ७ | ३ | ४ | ४ | २ | १ | २ | ४ | ५ | ६ | १ | ३ | ३९ |
| लग्नाष्टकवर्ग | ६ | ३ | ५ | २ | ५ | ५ | ३ | ६ | ३ | ४ | ४ | ३ | ४९ |
| ग्रह | चं. शु. | सू. | बु. बृ. | श. | मं. | ||||||||
| योग | ४२ | ३२ | ३८ | २५ | ३२ | २६ | २९ | ३७ | ३३ | ३४ | २९ | ३२ | ३८९ |