भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

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३८२ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् अथ शताब्दिकादशाज्ञानाय चक्रम्—

सू.चं.शु.बु.बृ.मं.श.ग्रहाः
१०१०२०२०३०वर्षाणि
रे.अ.भ.कृ.रो.मृ.आ.
पुन.पु.श्ले.म.पू.फा.उ.फा.ह.नक्षत्राणि
चि.स्वा.वि.अनु.ज्ये.मू.पू.षा.
उ.षा.श्र.ध.श.पू.भा.उ.भा.+

इति शताब्दिका दशा। अथ चतुरशीत्यब्दिकां दशामाह— रविश्चन्द्रः कुजः सौम्यो जीवः शुक्रः शनैश्चरः। तमध्वजौ विना सर्वे ग्रहा द्वादश हायनाः॥३५॥ रवि, चन्द्र, भौम, बुध, गुरु, शुक्र और शनि की राहु-केतु को छोड़कर १२, बारह वर्ष की दशा होती है॥३५॥ षवनाज्जन्मभं यावत्सप्ततष्टे दशा भवेत्। चतुरशीतिका ज्ञेया कर्मेशे कर्मसंस्थिते॥३६॥ स्वाती से जन्मनक्षत्र तक गिनकर सात से भाग दें, शेष तुल्य सूर्यादि की दशा होती है। इसे चतुरशीत्यब्दिका (८४ वर्ष की) दशा कहते हैं। यदि कर्मेश कर्मस्थान में हो तो उस समय इस दशा को लेना चाहिए॥३६॥ अथ चतुरशीत्यब्दिकादशाचक्रम्—

सू.चं.मं.बु.बृ.शु.श.ग्रहाः
१२१२१२१२१२१२१२वर्षाणि
स्वा.वि.अनु.ज्ये.मू.पू.षा.उ.षा.
श्र.ध.श.पू.भा.उ.भा.रे.अ.
भ.कृ.रो.मृ.आ.पुन.पु.नक्षत्राणि
श्ले.म.पू.फा.उ.फा.ह.चि.+

इति चतुरशीत्यब्दिका दशा।