बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअथ सूक्ष्मन्तरदशाध्यायः । ५६३ अथचंद्राप्रत्यंतरेचंद्रादीनांसूक्ष्मांतरफलम्- भूषणं भूमिलाभश्च सन्मानं नृपपूजनम् । तामसत्वं गुरुत्वं च चन्दसूक्ष्मदशाफलम् ॥१९१॥ (चं.चं.) चन्द्रमा के प्रत्यन्तर में चन्द्रमा के सूक्ष्मान्तर में आभूषण तथा भूमि का लाभ, सन्मान और राजा से पूजन, तामस और गुरुता होता है॥१९१॥ दुःखं शत्रुविरोधश्च कुक्षिरोगः पितुर्मृतिः । वातपित्तकफोद्रेकः शशिसूक्ष्मगते कुजः ॥१९२॥ (चं.मं.) चन्द्रमा के प्रत्यंतर में भौम के सूक्ष्मान्तर में दुःख, शत्रु से विरोध, कुक्षीस्थान में रोग, पिता की मृत्यु और वात-पित्त-कफ का रोग होता है॥१९२॥ क्रोधनं मित्रबंधूनां देशत्यागो धनक्षयः । विंदेशात्रिगडप्राप्तिरिन्दुसूक्ष्मगतेत्यहौ ॥१९३॥ (चं.स.) चन्द्रमा के प्रत्यंतर में राहु के सूक्ष्मान्तर में मित्र तथा बन्धुओं से द्वेष, देश का त्याग, धन का नाश, विदेश में बंधन होता है॥१९३॥ छत्रचामर संयुक्तं वैभवं पुत्रसम्पदः । सर्वत्र सुखमाप्नोति चन्द्रसूक्ष्मगतेगुरौ ॥१९४॥ (चं.रा.) चन्द्रमा के प्रत्यंतर में गुरु के सूक्ष्मान्तर में छत्र-चामर युक्त राज वैभव की प्राप्ति पुत्र का लाभ और सुख होता है॥१९४॥ राजोपद्रवनाशः स्याद्व्यवहारे धनक्षयः । चौरत्वं विप्रभीतिश्च चन्द्रसूक्ष्मगते शनौ ॥१९५॥ (चं.श.) चन्द्रमा के प्रत्यन्तर में शनि के सूक्ष्मान्तर में राजा के उपद्रव से हानि, रोजगार में धन की हानि, चोरी और ब्राह्मण से भय होता है॥१९५॥ राजमानं वस्तुलाभं विदेद्वाहनादिकम् । पुत्रपौत्रसमृद्धिश्च चन्द्र सूक्ष्मगते बुधे ॥१९६॥ (चं.बु.) चन्द्रमा के प्रत्यन्तर में बुध के सूक्ष्मान्तर में राजा से प्रतिष्ठा, वस्तु का लाभ, विदेश से वाहनादि का लाभ और पुत्र-पौत्र आदि समृद्धि का लाभ होता है॥१९६॥ आत्मनो वृत्तिहननं सस्यशृंगवृषादिभिः । अग्निसूर्यादिभीतिः स्याच्चन्द्रसूक्ष्मगतेध्वजे ॥१९७॥ (चं.के.) चन्द्रमा के प्रत्यन्तर में केतु के सूक्ष्मान्तर में धान्य मृग और बैल आदि से